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विश्व पुस्तक दिवस और मेरी पसंदीदा किताबें

विश्व पुस्तक दिवस और मेरी पसंदीदा किताबें

आज विश्व पुस्तक दिवस है और किताबों का नाम सुनते ही एक ऐसे मोतबर हमसफ़र की छब हमारे ज़ेहन में बन जाती है जिसने सीखने के सफ़र में क़दम-क़दम पर हमारा साथ दिया है| पैदा होते ही हमारा सीखने का सफ़र शुरू हो जाता है और इस सफ़र में किताबें पहले तो हमें हर्फ़ और लफ्ज़ पहचानना सिखाती हैं फिर दिल लुभाने वाली, एक अलग ही दुनिया में ले जानी वाली कहानियाँ सुनाती हैं| स्कूल की किताबें हमें इब्तिदाई इल्म की बातें बताती हैं तो कई अज़ीम शख्सियतों की लिखी किताबें हमें मुश्किल वक़्त से उबरना सिखाती हैं, ज़िन्दगी जीने का सलीक़ा सिखाती हैं|

आज मैं बात करने जा रहा हूँ अपनी कुछ पसंदीदा किताबों के बारे में जिन्होंने कभी मेरे बेचैन दिल को सुकून पहुँचाया तो कभी मेरी तख़्लीक़ी सलाहियतों में इज़ाफ़ा किया; कभी देश और दुनिया को लेकर मेरा इल्म बढ़ाया तो कभी जीने के लिए मुझे अमली तौर पर समझदार बनाया|

आइए, शुरू करते हैं कहानियों की चंद किताबों से| कहानियाँ की किताबें सफ़र करते वक़्त मेरी पहली पसंद होती हैं और ऐसी चंद किताबें मैं हमेशा अपने साथ रखता हूँ|

  1. “प्रतिनिधि कहानियाँ - मुक्तिबोध”: हिंदी के प्रसिद्ध कवि-लेखक मुक्तिबोध की कहानियाँ एक ही साथ विचारात्मक भी हैं और आत्मकथात्म्क भी| इस संग्रह में मुझे “ब्रह्मराक्षस का शिष्य”, काठ का सपना”, मैत्री की माँग” कहानियाँ मुझे ख़ास तौर पर पसंद हैं|
  2. “प्रतिनिधि कहानियाँ – मोहन राकेश”: प्रसिद्ध कथाकार मोहन राकेश की कहानियाँ समाज के संवेदनशील व्यक्ति और समय के प्रवाह से एक अनुभूति क्षण चुनकर उन दोनों के सार्थक सम्बन्ध को खोज निकालती है।
  3. “उर्दू की प्रसिद्ध कहानियाँ” : उर्दू ज़बान में भी एक से एक कहानीकार हुए जिन्होंने समाज के अनछुए अनुभवों को बड़े ही सलीक़े से बयान करती है| “उर्दू की प्रसिद्ध कहानियाँ” किताब में प्रकाशित उर्दू 10 प्रमुख कहानीकारों की लोकप्रिय कहानियाँ पढ़ी जाने लायक़ हैं|

कहानियों के अलावा उर्दू शाइरी ने मुझे बहुत ही मुतास्सिर किया है| नीचे मैं चंद ऐसी किताबों का ज़िक्र करने जा रहा हूँ जिन्हें हर साहित्य-प्रेमी को पढ़ना चाहिए|

  1. “उदासी बाल खोले सो रही है” / “खिड़की तो मैंने खोल ही ली” : मैं सभी साहित्य-प्रेमियों को उर्दू शाइरी पढ़ने की शुरुआत आसान ज़बान की शाइरी से करनी की सलाह दूँगा| शुरुआत करने के लिए प्रसिद्ध शाइर नासिर काज़मी की “उदासी बाल खोले सो रही है” और शारिक़ कैफ़ी की “खिड़की तो मैंने खोल ही ली” सबसे मुफ़ीद किताबें हैं|
  2. “रेख़्ता क्लासिक्स सीरीज़”: क्लासिकी शाइरी में दिलचस्पी रखने वाले दोस्तों को “रेख़्ता के दाग़”, “रेख़्ता के ज़ौक़”, “रेख़्ता के नज़ीर”, “रेख़्ता के आतिश”, “रेख़्ता के मोमिन”, “रेख़्ता के इंशा” किताबें काफ़ी मदद कर सकती हैं|

बात करें उपन्यासों की तो हिंदी-उर्दू में ऐसे उपन्यास हैं जिन्हें पढ़ना पाठकों के लिए अपने आप में एक तजरबा साबित होता है|

  1. “राग दरबारी”: प्रसिद्ध उपन्यासकार श्रीलाल शुक्ल का यह साहित्य अकादमी से पुरस्कृत उपन्यास है जो स्वतंत्रता के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत दर परत उघाड़ता है|
  2. “निठल्ले की डायरी”: हिंदी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की यह एक अनोखी किताब है जिसकी एक–एक पंक्ति एक सोद्देश्य टिप्पणी के रूप में अपना स्थान बनाती है।
  3. “कितने पाकिस्तान”: चर्चित साहित्यकार कमलेश्वर कृत यह उपन्यास मानवता के दरवाजे पर इतिहास और समय की एक दस्तक है... इस उम्मीद के साथ कि भारत ही नहीं, दुनिया भर में एक के बाद एक दूसरे पाकिस्तान बनाने की लहू से लथपथ यह परम्परा अब खत्म हो|

अब बात करते हैं साहित्य की उस विधा की जिसने मुझे सबसे ज़ियादा प्रेरित किया| आत्मकथाएँ और जीवनियाँ|

  1. “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम - एक जीवन” : वैमानिक इंजीनियर, रॉकेट वैज्ञानिक, मिसाइल मैन, स्वप्नदृष्टा, शिक्षक और याद आने वाले सबसे प्रेरक राष्ट्रपति - अबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम इन सब से भी बढ़कर हैंI निःसन्देह वे महात्मा गांधी के बाद सबसे सम्मानित भारतीय नेता हैंI
  2. “ज़ाकिर हुसैन एक संगीतमय जीवन” : इस किताब में आपको उत्कृष्ट तबला वादक, संगीतकार और तालवाद्य के जानकार ज़ाकिर हुसैन के नसरीन मुन्नी कबीर के साथ संवाद पढ़ने को मिलेंगे जो कि कई दृष्टिकोण से उत्कृष्ट हैं|
  3. “द लास्ट गर्ल” :यह किताब नादिया मुराद एक साहसी यज़ीदी युवती के प्रेरणादायक सफ़र को बयान करती है जिन्होंने आईएसआईएस की कैद में रहते हुए यौन उत्पीड़न और अकल्पनीय दुख सहन किया लेकिन कभी नादिया ने हिम्मत नहीं हारी।

ये तमाम किताबें अलग-अलग प्रकाशन संस्थानों से प्रकाशित हुई हैं लेकिन आप ये सभी किताबें एक ही प्लेटफ़ॉर्म यानी rekhtabooks.com से हासिल कर सकते हैं| मैं आप सभी सुधी पाठकों को मैं विश्व पुस्तक दिवस की दिली मुबारकबाद देता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि आप इन किताबों पे ग़ौर फ़रमाएँगे और इन्हें पढ़ने के बाद अपनी राय मुझसे भी साझा करेंगे| पढ़ते रहिए, बढ़ते रहिए|

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