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विश्व पुस्तक दिवस और मेरी पसंदीदा किताबें

विश्व पुस्तक दिवस और मेरी पसंदीदा किताबें

आज विश्व पुस्तक दिवस है और किताबों का नाम सुनते ही एक ऐसे मोतबर हमसफ़र की छब हमारे ज़ेहन में बन जाती है जिसने सीखने के सफ़र में क़दम-क़दम पर हमारा साथ दिया है| पैदा...

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Book Review: Jism Ka Bartan Sard Pada Hai

Book Review: Jism Ka Bartan Sard Pada Hai

ये मैं हूंँ और ये मैं हूंँ ये एक मैं ही हूंँ मगर ख़लीज सी इक दरमियान देखता हूंँ ख़लीज: अंतर खाड़ीकहांँ-कहाँ नई ता'मीर की ज़रूरत है सो तेरी आंँखों से अपना जहान देखता हूंँ...

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Book Review: Ek Diya Aur Ek Phool

Book Review: Ek Diya Aur Ek Phool

मेरा क़द मेरे बाप से ऊंचा निकला और मेरी मांँ जीत गई * ऐ जीवन के प्यारे दुख मेरे अंदर दिया जलाना बुझ मत जाना * मेरे बच्चे तेरी आंँखें, तेरे लब देखकर मैं सोचती...

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Book Review: Rangon Ki Manmaani

Book Review: Rangon Ki Manmaani

  मोहब्बत बोझ बन कर ही भले रहती हो काँधों परमगर यह बोझ हटता है तो काँधें टूट जाते हैं बहुत दिन मस्लिहत की क़ैद में रहते नहीं जज़्बेमोहब्बत जब सदा देती है पिंजरे टूट...

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Book Review: Mitti Ki Sundarta Dekho

Book Review: Mitti Ki Sundarta Dekho

सर्वत हुसैन की ग़ज़लें और नज़्मों को नुमायां करने वाली एक किताब "मिट्टी की सुंदरता देखो" जो रेख़्ता बुक्स की ख़ुसूसी इंतख़ाब में से एक हैं.. इस किताब के बारे में और सर्वत के बारे...

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Book Review: Khidki To Main Ne Khol Hi Li

Book Review: Khidki To Main Ne Khol Hi Li

शारिक़ कैफ़ी : खिड़की तो मैं ने खोल ही ली नए नए प्रयोग साहित्य निर्माण मैं एक नई मन्ज़िल की ओर इशारा करते हैं। निश्चय ही ऐसे साहित्य प्रेमी अपनी सृजनात्मक प्रयासों से न केवल...

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Book Review: Ishq

Book Review: Ishq

पिछले कुछ दिनों में कई किताबें पढ़ीं। शाइरी से कुछ ज़ियादा ही लगाव है इसलिए शाइरी को अक्सर पढ़ता हूं। अलबत्ता फिक्शन भी ख़ूब भाता है। पिछले कुछ सालों में जिन नए शो'अरा ने अपनी...

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Book Review: Subah Ba-Khair Zindagi

Book Review: Subah Ba-Khair Zindagi

अमीर इमाम फितरी शायर है... अपने इस जुमले की ताईद में कुछ शे'र इस मजमुऐ से दर्ज करता हूं जो जवां साल शायर अमीर इमाम का दूसरा शे'री मजमूआ है जिसे रेख़्ता फाउंडेशन ने उर्दू...

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Book Review: Maujood Ki Nisbat Se

Book Review: Maujood Ki Nisbat Se

रेख़्ता पब्लिकेशन्स की, रेख़्ता, 'हर्फ़-ए-ताज़ा' सीरीज़ की ताज़ा पेशकश है नौजवान और ज़हीन शायर महेन्द्र कुमार 'सानी' की ग़ज़लों का मजमूआ ब-उनवान 'मौजूद की निस्बत से'।  यह महेन्द्र कुमार सानी का पहला शेरी मजमूआ है...

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Book Review: Sabhi Rang Tumhar Nikle

Book Review: Sabhi Rang Tumhar Nikle

सालिम सलीम आ'ला तालीम याफ्ता नौजवान शायर है जो पिछली एक डेढ़ दहाई से शायरी के मैदान में सरगर्म है। सालिम का पहला शे'री मजमूआ उर्दू में 'वाहिमा वजूद का' और हिंदी में 'सभी रंग...

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