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पढ़िए सच लिखने के लिए 'बदनाम' मंटो की कहानियां

पढ़िए सच लिखने के लिए 'बदनाम' मंटो की कहानियां

BOOK REVIEW: मंटो 15 कहानियां (Manto 15 stories)

उर्दू का एक कहानीकार बहुत मशहूर हुआ और बदनाम भी. फिर मुक़दमे भी झेले. उसकी कहानियों की किताबें ज़ब्त हुईं. कहा गया कि इसके अफ़साने, इसकी कहानियां अश्लील हैं. लेकिन वो सबसे नज़रें मिला कर कहता रहा कि

'मेरे अफ़साने नहीं , ज़माना ही नाकाबिल-ए-बर्दाश्त है'

बंटवारे के दौरान पाकिस्तान आ गए मंटो ने ख़ुद कहा कि मुझे नहीं पता था कि इस नए मुल्क़ में कोई कैसी चीज़ें लिखेगा और लोग किसी चीजें पढ़ेंगे. फिर मैंने वो लिखा जो समाज में घटा. समाज अपना ही सच नहीं देख सका.

मंटो के ऊपर लगातार मुक़दमे चलते रहे. यहाँ तक की उनकी कहानियां छापने वालों सम्पादकों के ऊपर भी. लेकिन वो इनसे डरे नहीं. 'ठंडा गोश्त' , 'ऊपर,नीचे और दरमियान' ऐसी कई कहानियां क़ानूनी पचड़े में फंसी. मंटो पर जुर्माना लगा. लेकिन ये उनके कहन का ही जादू था कि जुर्माना लगाने वाले जज ने ही उनसे मिलते ही कहा कि मैं आपके कहानियों का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ.

उन्होंने शोहरत की तरह ही बदनामी कमाई थी और शायद यही उनके रचनात्मक हिम्मत की वास्तविक कमाई भी होगी. इंसानी मनोविज्ञान के दोहरेपन को मंटो ने अपनी कहानियों में ढाला अगर उन्हें बदनाम न किया जाता, अश्लीलता के आरोप न लगते तो शायद वो नाकामयाब भी माने जाते.


उनकी कहानियों में मानो लगता है कि सभ्यता और इंसान की बिल्कुल पाश्विक प्रवृत्तियों के बीच जो द्वंद है, उसे उघाड़कर रख दिया गया है. सभ्यता का नकाब ओढ़े इंसानी समाज को चुनौती देती उनकी कहानियां बहुत वाजिब थी कि उसके लेखक को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगवाए. अंग्रेजों के ज़माने से ही मंटो मुकदमे झेल रहे थे. रही सही कसर आज़ादी के बाद पाकिस्तान में पूरी हुई. वहाँ उन्हें सजा तो नहीं हुई पर जुर्माना ज़रूर लगा. एक मुक़दमा तो मरने के बाद भी उन पर चला.


सआ’दत हसन मंटो ने चन्द ख़ास लोगों के अपने अनुभवों को शब्द-चित्रों के रूप में पेश किया है जो ‘गंजे फ़रिश्ते’ नाम की किताब में प्रकाशित हुए। इस किताब में मंटो ने इन सारे लोगों के साथ अपनी दोस्ती को बयां तो ज़रूर किया है लेकिन उनकी शख्सियत के उजले-काले हर पहलू पर लिखा है. ओरिजिनली यह किताब उर्दू में छपी है जिसमें शब्द-चित्रों की मदद से मंटो ने इसे लिखा है. मूल किताब में 13 शब्द चित्र हैं लेकिन हम आपके लिए इस किताब में छह शब्द चित्रों को एक जगह संकलित कर लाए हैं, देवनागरी में. इसी किताब में मंटो लिखते हैं कि मैं ऐसे समाज पर हज़ार लानत भेजता हूं जहां यह उसूल हो कि मरने के बाद हर शख्स के किरदार को लॉन्ड्री में भेज दिया जाए जहां से वो धुल-धुलाकर आए.

मंटो आपको पसंद हैं , उनकी कहानियाँ आपको सोचने पर मजबूर करती हो तो ये किताब आपके लिए है.

मंटो आपको पसंद हैं , उनकी कहानियाँ आपको सोचने पर मजबूर करती हो तो ये किताब आपके लिए है.

दूसरी किताब में मंटो की और कई कहानियों का संकलन किया गया है. किताब का नाम है 'नुमाइन्दा कहानियां-मंटो'.
ये किताब 'रेख़्ता कथा साहित्य’ सिलसिले के तहत छपी मश्हूर कहानीकार सआदत हसन मंटो की चुनिन्दा उर्दू कहानियों का संकलन है. पढ़ने वालों के लिए इसे भी देवनागरी लिपि में लाया गया है।

आप ये किताब यहां से ऑर्डर कर सकते हैं.
https://rekhtabooks.com/products/manto-pandrah-kahaniyan-hindi

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