BackBack
-11%

Sahaj Gita

Rs. 395 Rs. 352

गीता के अनगिनत अनुवादों और भाष्यों के बावजूद आज ऐसे संस्करण उपलब्ध नहीं हैं जो आम आदमी को गीता पढ़ने में और उसके उपदेशों के बारे में निजी राय क़ायम करने में बहुत सहायता दे सकें—हालत यह है कि आम आदमी न तो गीता का मूल संस्कृत पाठ पढ़ पाता... Read More

BlackBlack
Description

गीता के अनगिनत अनुवादों और भाष्यों के बावजूद आज ऐसे संस्करण उपलब्ध नहीं हैं जो आम आदमी को गीता पढ़ने में और उसके उपदेशों के बारे में निजी राय क़ायम करने में बहुत सहायता दे सकें—हालत यह है कि आम आदमी न तो गीता का मूल संस्कृत पाठ पढ़ पाता है, न अधिकतर अनुवादों की उलझी भाषा के कारण श्लोकों के अर्थ समझ पाता है—पाठकों की कठिनाइयाँ दूर करने के लिए यह सहज संस्करण एक साथ दो काम करता है—इसमें गीता के मूल संस्कृत पाठ को आम आदमी की सुविधा मात्र के लिए एक बिलकुल नई और सहज शैली में लिखा गया है—इस शैली के कारण संस्कृत के श्लोकों को पढ़ना काफ़ी हद तक सहज हो गया है। कहीं भी गीता के प्रवाह में व्यवधान नहीं आया है और न कहीं किसी प्रकार संस्कृत व्याकरण की हानि हुई है—वहीं इसमें गीता के श्लोकों का हिन्दी गद्य अनुवाद सीधे-सादे और छोटे-छोटे वाक्यों में किया गया है—भाषा आसान, आधुनिक और गैर–पंडिताऊ है, जिसे आज का आम पाठक बड़ी सहजता से समझ सकता है। Gita ke anaginat anuvadon aur bhashyon ke bavjud aaj aise sanskran uplabdh nahin hain jo aam aadmi ko gita padhne mein aur uske updeshon ke bare mein niji raay qayam karne mein bahut sahayta de saken—halat ye hai ki aam aadmi na to gita ka mul sanskrit path padh pata hai, na adhiktar anuvadon ki uljhi bhasha ke karan shlokon ke arth samajh pata hai—pathkon ki kathinaiyan dur karne ke liye ye sahaj sanskran ek saath do kaam karta hai—ismen gita ke mul sanskrit path ko aam aadmi ki suvidha matr ke liye ek bilkul nai aur sahaj shaili mein likha gaya hai—is shaili ke karan sanskrit ke shlokon ko padhna kafi had tak sahaj ho gaya hai. Kahin bhi gita ke prvah mein vyavdhan nahin aaya hai aur na kahin kisi prkar sanskrit vyakran ki hani hui hai—vahin ismen gita ke shlokon ka hindi gadya anuvad sidhe-sade aur chhote-chhote vakyon mein kiya gaya hai—bhasha aasan, aadhunik aur gair–panditau hai, jise aaj ka aam pathak badi sahajta se samajh sakta hai.