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Rog Nirog

Dr. Yatish Agarwal

Rs. 395 Rs. 352

प्रख्यात डॉक्टर, लेखक और स्तम्‍भकार डॉ. यतीश अग्रवाल की यह कृति हर दिन सामने आनेवाली स्वास्थ्य उलझनों का सरल समाधान प्रस्तुत करती है। पुस्तक के प्रथम खंड में छोटी–छोटी सावधानियों और शरीर की देखरेख के बारे में अनेक उपयोगी जानकारियाँ हैं; जैसे—बालों की साज–सँभाल, अच्छी नींद के नुस्खे, लो ब्लड... Read More

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Description

प्रख्यात डॉक्टर, लेखक और स्तम्‍भकार डॉ. यतीश अग्रवाल की यह कृति हर दिन सामने आनेवाली स्वास्थ्य उलझनों का सरल समाधान प्रस्तुत करती है। पुस्तक के प्रथम खंड में छोटी–छोटी सावधानियों और शरीर की देखरेख के बारे में अनेक उपयोगी जानकारियाँ हैं; जैसे—बालों की साज–सँभाल, अच्छी नींद के नुस्खे, लो ब्लड प्रेशर का इलाज, यहाँ तक कि जूते लेते समय किन–किन बातों पर ध्यान देने की ज़रूरत है आदि। सलाहों जिन पर अमल क़तई मुश्किल नहीं और उपयोगी इतनी कि जीवन का सुख कई गुना हो जाए। दूसरा खंड परख पर केन्द्रित है जिसमें लेबोरेटरी टेस्ट, बायोप्सी, एक्स-रे, रंगीन एक्स–रे, अल्ट्रासाउंड, सी.टी. स्केन, एम.आर.आई. जैसे सभी प्रमुख जाँच-परीक्षणों पर व्यावहारिक जानकारियाँ हैं। तीसरे खंड में दवाएँ और हम में डॉक्टर के परचे के संकेत, दवाओं के साथ सावधानियाँ और उनके पार्श्व-प्रभाव पर छोटी-छोटी बेशक़ीमती जानकारियाँ हैं। चौथे खंड में जब ज़रूरत हो ऑपरेशन की में ऑपरेशन के फ़ैसले, उससे सम्बन्धित तैयारियों और अस्पताल से छुट्टी लेते समय डॉक्टर से पूछे जानेवाले ज़रूरी सवालों के बारे में बताया गया है। सरल बोलचाल की भाषा में पूरी प्रमाणिकता के साथ रची गई यह ‘रोग-निरोग’ हर घर और हर पुस्तकायल के लिए एक ज़रूरी पुस्‍तक है। Prakhyat dauktar, lekhak aur stam‍bhakar dau. Yatish agrval ki ye kriti har din samne aanevali svasthya ulajhnon ka saral samadhan prastut karti hai. Pustak ke prtham khand mein chhoti–chhoti savdhaniyon aur sharir ki dekhrekh ke bare mein anek upyogi jankariyan hain; jaise—balon ki saj–sanbhal, achchhi nind ke nuskhe, lo blad preshar ka ilaj, yahan tak ki jute lete samay kin–kin baton par dhyan dene ki zarurat hai aadi. Salahon jin par amal qatii mushkil nahin aur upyogi itni ki jivan ka sukh kai guna ho jaye. Dusra khand parakh par kendrit hai jismen leboretri test, bayopsi, eks-re, rangin eks–re, altrasaund, si. Ti. Sken, em. Aar. Aai. Jaise sabhi prmukh janch-parikshnon par vyavharik jankariyan hain. Tisre khand mein davayen aur hum mein dauktar ke parche ke sanket, davaon ke saath savdhaniyan aur unke parshv-prbhav par chhoti-chhoti beshqimti jankariyan hain. Chauthe khand mein jab zarurat ho aupreshan ki mein aupreshan ke faisle, usse sambandhit taiyariyon aur asptal se chhutti lete samay dauktar se puchhe janevale zaruri savalon ke bare mein bataya gaya hai. Saral bolchal ki bhasha mein puri prmanikta ke saath rachi gai ye ‘rog-nirog’ har ghar aur har pustkayal ke liye ek zaruri pus‍tak hai.

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