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Rajyapal

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कन्नड़ देश की भाषा और संस्कृति के इतिहास में कल्याणी चालुक्य राजाओं का शासनकाल अनेक दृष्टियों से महत्त्व का तथा प्रभावशाली रहा है। चालुक्य राजाओं में पेर्माडी जगदेकमल्ल के पश्चात् जिन तैलप (शतम्) ने सिंहासन का आरोहण किया वे विलासी, आलसी, राजनीति के क्षेत्र में एकदम अनुभवहीन थे। उनकी इन... Read More

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Description

कन्नड़ देश की भाषा और संस्कृति के इतिहास में कल्याणी चालुक्य राजाओं का शासनकाल अनेक दृष्टियों से महत्त्व का तथा प्रभावशाली रहा है। चालुक्य राजाओं में पेर्माडी जगदेकमल्ल के पश्चात् जिन तैलप (शतम्) ने सिंहासन का आरोहण किया वे विलासी, आलसी, राजनीति के क्षेत्र में एकदम अनुभवहीन थे। उनकी इन दुर्बलताओं के फलस्वरूप उनके सामन्त तथा दंडनायक कलचूरी वंशीय बिज्जल के हाथ में राज्य का सूत्र चला गया।
राज्यापहरण की इस घटना के बाद बारहवीं सदी में एक अभूतपूर्व साहित्यिक-धार्मिक क्रान्ति का प्रादुर्भाव हुआ। इस क्रान्ति के कारण बिज्जल का राज्यकाल इतिहास में अपना एक पदचिह्न छोड़ गया है। इस क्रान्ति के कर्णधार थे बिज्जल के मंत्रिपरिषद् के सदस्य भक्ति-भंडारी बसवेश।
इस कालावधि में जो घटनाएँ हुईं, वे ही इस ‘राज्यपाल’ उपन्यास की कथा-वस्तु हैं। उपन्यास की पीठिका के रूप में तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियों का समसामयिक साहित्य, शिला-लेख आदि की सहायता से चित्रित करने का प्रयत्न किया गया है।
सिद्धहस्त लेखक बी. पुट्टस्वामय्या ने प्रांजल भाषा में एक युग को साकार कर दिया है। भालचन्द्र जयशेट्टी का सतर्क अनुवाद उपन्यास को मूल आस्वाद से अभिन्न रखने में समर्थ सिद्ध हुआ है। Kannad desh ki bhasha aur sanskriti ke itihas mein kalyani chalukya rajaon ka shasankal anek drishtiyon se mahattv ka tatha prbhavshali raha hai. Chalukya rajaon mein permadi jagdekmall ke pashchat jin tailap (shatam) ne sinhasan ka aarohan kiya ve vilasi, aalsi, rajniti ke kshetr mein ekdam anubhavhin the. Unki in durbaltaon ke phalasvrup unke samant tatha dandnayak kalchuri vanshiy bijjal ke hath mein rajya ka sutr chala gaya. Rajyapahran ki is ghatna ke baad barahvin sadi mein ek abhutpurv sahityik-dharmik kranti ka pradurbhav hua. Is kranti ke karan bijjal ka rajykal itihas mein apna ek padchihn chhod gaya hai. Is kranti ke karndhar the bijjal ke mantriparishad ke sadasya bhakti-bhandari basvesh.
Is kalavadhi mein jo ghatnayen huin, ve hi is ‘rajypal’ upanyas ki katha-vastu hain. Upanyas ki pithika ke rup mein tatkalin samajik, rajnitik paristhitiyon ka samsamyik sahitya, shila-lekh aadi ki sahayta se chitrit karne ka pryatn kiya gaya hai.
Siddhhast lekhak bi. Puttasvamayya ne pranjal bhasha mein ek yug ko sakar kar diya hai. Bhalchandr jayshetti ka satark anuvad upanyas ko mul aasvad se abhinn rakhne mein samarth siddh hua hai.