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Nij Nainahin Dekhi

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केशवचन्द्र वर्मा का नाम इस कारण भी रेखांकित किया जाता है कि उन्होंने न केवल व्यंग्य-लेखन की हर विधा में सर्वप्रथम श्रेष्ठ उपलब्धियों वाली रचनाएँ कीं—चाहे हास्य व्यंग्य के उपन्यास हों, कहानियाँ हों, सम्पूर्ण नाटक और निबन्ध हों—परन्तु अन्य गम्भीर रचना के क्षेत्र में अपनी कविताओं और संगीत विषयक अनेक... Read More

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Description

केशवचन्द्र वर्मा का नाम इस कारण भी रेखांकित किया जाता है कि उन्होंने न केवल व्यंग्य-लेखन की हर विधा में सर्वप्रथम श्रेष्ठ उपलब्धियों वाली रचनाएँ कीं—चाहे हास्य व्यंग्य के उपन्यास हों, कहानियाँ हों, सम्पूर्ण नाटक और निबन्ध हों—परन्तु अन्य गम्भीर रचना के क्षेत्र में अपनी कविताओं और संगीत विषयक अनेक कृतियों को हिन्दी में पहली बार प्रस्तुत करने का श्रेय भी पाया है।
हिन्दी साहित्य के किताबी इतिहास से उसे मुक्त करके केशव जी ने जिस तरह अपनी पुस्तकों—‘ताकि सनद रहे’ और उसी क्रम में ‘निज नैनहिं देखी’ को अपने प्रामाणिक निजी साक्ष्य के रूप में प्रकाशित किया, वह निःसन्देह उन्हें इस क्षेत्र में भी सर्वश्रेष्ठ बनाती है। अपने समकालीनों में तो उनकी पहचान नितान्त विशिष्ट है ही—वे स्वयं अपनी रचना-प्रक्रिया को अपनी विविधता से चुनौती देते हैं। इसका साक्ष्य केशव जी का तमाम लेखन है। Keshavchandr varma ka naam is karan bhi rekhankit kiya jata hai ki unhonne na keval vyangya-lekhan ki har vidha mein sarvaprtham shreshth uplabdhiyon vali rachnayen kin—chahe hasya vyangya ke upanyas hon, kahaniyan hon, sampurn natak aur nibandh hon—parantu anya gambhir rachna ke kshetr mein apni kavitaon aur sangit vishyak anek kritiyon ko hindi mein pahli baar prastut karne ka shrey bhi paya hai. Hindi sahitya ke kitabi itihas se use mukt karke keshav ji ne jis tarah apni pustkon—‘taki sanad rahe’ aur usi kram mein ‘nij nainahin dekhi’ ko apne pramanik niji sakshya ke rup mein prkashit kiya, vah niःsandeh unhen is kshetr mein bhi sarvashreshth banati hai. Apne samkalinon mein to unki pahchan nitant vishisht hai hi—ve svayan apni rachna-prakriya ko apni vividhta se chunauti dete hain. Iska sakshya keshav ji ka tamam lekhan hai.