BackBack
-11%

Mrityu Mere Dwar Per

Khushwant Singh, Tr. Shubhankar Mishr

Rs. 299 Rs. 266

यह पुस्तक अंग्रेज़ी के मशहूर लेखक खुशवन्त सिंह की पुस्तक ‘डेथ एट माई डोरस्टेप : ओबिट्युअरीज़’ का अनुवाद है जिसमें उन्होंने कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए मृत्यु के विषय में अपना नज़रिया व्यक्त किया है। पुस्तक के पहले खंड में उन्होंने दलाई लामा एवं आचार्य रजनीश के मृत्यु... Read More

BlackBlack
Vendor: Rajkamal Categories: Rajkamal Prakashan Books Tags: Memoirs
Description

यह पुस्तक अंग्रेज़ी के मशहूर लेखक खुशवन्त सिंह की पुस्तक ‘डेथ एट माई डोरस्टेप : ओबिट्युअरीज़’ का अनुवाद है जिसमें उन्होंने कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए मृत्यु के विषय में अपना नज़रिया व्यक्त किया है।
पुस्तक के पहले खंड में उन्होंने दलाई लामा एवं आचार्य रजनीश के मृत्यु के बारे में विचारों को रखा है और बुढ़ापा, मृत्यु का अनुभव, मृत्यु के पश्चात् जीवन और मृतकों से ज्ञान के बारे में काफ़ी दिलचस्प अन्दाज़ में लिखा है। पुस्तक के दूसरे खंड में कई हस्तियों की मृत्यु के पश्चात् लिखी गई श्रद्धांजलियाँ जिनमें जेड.ए. भुट्टो, संजय गांधी, माउंटबेटन, रजनी पटेल, धीरेन भगत, प्रभा दत्त, हरदयाल, मुल्कराज आनन्द, नीरद बाबू, बलवन्त गार्गी, फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’, आर.के. नारायण, प्रोतिमा बेदी, नरगिस दत्त, अमृता शेरगिल, भीष्म साहनी सहित अपनी दादी माँ, राज-विला के छज्जू राम और अपने कुत्ते सिम्बा के अलावा अपने ऊपर भी समाधि लेख लिखा है।
इस पुस्तक को पढ़ते हुए खुशवन्त सिंह के चुटीले और खिलंदड़े अन्दाज़ की झलक मिलेगी और उनकी तटस्थता पाठकों को बेहद प्रभावित करेगी। Ye pustak angrezi ke mashhur lekhak khushvant sinh ki pustak ‘deth et mai dorastep : obityuariz’ ka anuvad hai jismen unhonne kai mahan hastiyon ko shraddhanjali dete hue mrityu ke vishay mein apna nazariya vyakt kiya hai. Pustak ke pahle khand mein unhonne dalai lama evan aacharya rajnish ke mrityu ke bare mein vicharon ko rakha hai aur budhapa, mrityu ka anubhav, mrityu ke pashchat jivan aur mritkon se gyan ke bare mein kafi dilchasp andaz mein likha hai. Pustak ke dusre khand mein kai hastiyon ki mrityu ke pashchat likhi gai shraddhanjaliyan jinmen jed. e. Bhutto, sanjay gandhi, mauntbetan, rajni patel, dhiren bhagat, prbha datt, haradyal, mulkraj aanand, nirad babu, balvant gargi, faiz ahmad ‘faiz’, aar. Ke. Narayan, protima bedi, nargis datt, amrita shergil, bhishm sahni sahit apni dadi man, raj-vila ke chhajju raam aur apne kutte simba ke alava apne uupar bhi samadhi lekh likha hai.
Is pustak ko padhte hue khushvant sinh ke chutile aur khilandde andaz ki jhalak milegi aur unki tatasthta pathkon ko behad prbhavit karegi.