BackBack

Main Kyon Nahin

Paru Madan Naik

Rs. 95

‘मैं क्यों नहीं?’ उपन्यास एक बहुत त्रासद सामाजिक विडम्बना को केन्द्र में रखकर लिखा गया है। पारू मदन नाईक ने भारतीय समाज में उन व्यक्तियों की व्यथा-कथा को रेखांकित किया है जो न स्त्री हैं न पुरुष। जो ‘हिजड़ा’ कहकर सम्बोधित किए जाते हैं जिनके लिए न परिवार सदय होता... Read More

Description

‘मैं क्यों नहीं?’ उपन्यास एक बहुत त्रासद सामाजिक विडम्बना को केन्द्र में रखकर लिखा गया है। पारू मदन नाईक ने भारतीय समाज में उन व्यक्तियों की व्यथा-कथा को रेखांकित किया है जो न स्त्री हैं न पुरुष। जो ‘हिजड़ा’ कहकर सम्बोधित किए जाते हैं जिनके लिए न परिवार सदय होता है न समाज उदार। हृष्ट-पुष्ट होने के बावजूद जिनके श्रम का कोई मूल्य नहीं आँका जाता। जाने कैसी-कैसी मुसीबतें झेलते हुए ‘हिजड़ा समुदाय’ के लोग अपना जीवन यापन करते हैं। यह उपन्यास इसी समुदाय के ‘भावनात्मक पुनर्वास’ का उपक्रम है।
उपन्यास नाज़ के माध्यम से आकार लेता है। नाज़ एक स्थान पर कहती है, ‘‘हमें, आपको, इस प्रकृति को ईश्वर ने ही बनाया है। हमें किसी दानव ने तो नहीं बनाया। लेकिन लोगों को इस बात का स्मरण नहीं रहता। क्या बताऊँ सर, किसी डॉक्टर के पास जाना पड़े, तो ठीक से ट्रीटमेंट भी नसीब नहीं होता। सहानुभूति से पेश आनेवाला, आप जैसा कोई, मुश्किल से ही मिलता है। शिक्षा पाना तो दूर, ऐसा ज़बरदस्त मखौल उड़ाया जाता है कि पूछिए मत!’’
अत्यन्त भावनाप्रवण उपन्यास। मराठी से अनुवाद करते समय सुनीता परांजपे ने भाषा-प्रवाह का विशेष ध्यान रखा है। ‘main kyon nahin?’ upanyas ek bahut trasad samajik vidambna ko kendr mein rakhkar likha gaya hai. Paru madan naik ne bhartiy samaj mein un vyaktiyon ki vytha-katha ko rekhankit kiya hai jo na stri hain na purush. Jo ‘hijda’ kahkar sambodhit kiye jate hain jinke liye na parivar saday hota hai na samaj udar. Hrisht-pusht hone ke bavjud jinke shram ka koi mulya nahin aanka jata. Jane kaisi-kaisi musibten jhelte hue ‘hijda samuday’ ke log apna jivan yapan karte hain. Ye upanyas isi samuday ke ‘bhavnatmak punarvas’ ka upakram hai. Upanyas naaz ke madhyam se aakar leta hai. Naaz ek sthan par kahti hai, ‘‘hamen, aapko, is prkriti ko iishvar ne hi banaya hai. Hamein kisi danav ne to nahin banaya. Lekin logon ko is baat ka smran nahin rahta. Kya bataun sar, kisi dauktar ke paas jana pade, to thik se tritment bhi nasib nahin hota. Sahanubhuti se pesh aanevala, aap jaisa koi, mushkil se hi milta hai. Shiksha pana to dur, aisa zabardast makhaul udaya jata hai ki puchhiye mat!’’
Atyant bhavnaprvan upanyas. Marathi se anuvad karte samay sunita paranjpe ne bhasha-prvah ka vishesh dhyan rakha hai.