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आशा प्रभात का यह उपन्यास एक औरत का ख़ुद को पहचानने और अपनी ख़ुदी को बरकरार रखने की अद्भुत संघर्ष-गाथा है। इसमें बाहरी और अंदरूनी स्तर पर घटनाएँ कुछ इस कदर शाइस्तगी से घटती हैं कि पाठक चौंकता है और ठहरकर सोचने पर विवश हो जाता है। इस उपन्यास में... Read More

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Description

आशा प्रभात का यह उपन्यास एक औरत का ख़ुद को पहचानने और अपनी ख़ुदी को बरकरार रखने की अद्भुत संघर्ष-गाथा है।
इसमें बाहरी और अंदरूनी स्तर पर घटनाएँ कुछ इस कदर शाइस्तगी से घटती हैं कि पाठक चौंकता है और ठहरकर सोचने पर विवश हो जाता है। इस उपन्यास में सदियों से प्रतीक्षारत इस सवाल का उत्तर तलाशने की एक पुरज़ोर कोशिश की गई है कि पति, पत्नी और वह के प्रेम त्रिकोण वाले सम्बन्धों में सबसे कमज़ोर स्थिति किसकी होती है?
अपने स्वत्व की तलाश में जुटी स्त्रियों के भटकाव की परिणति से अवगत कराता यह उपन्यास स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की बारीकी से पड़ताल करता है। लेखिका ने औरत से व्यक्ति बन जाने की जद्दोजहद को बहुत ही सहज भाषा में अभिव्यक्त करने का उपक्रम किया है। कथा-प्रवाह और पठनीयता की दृष्टि से भी यह एक उल्लेखनीय कृति है। Aasha prbhat ka ye upanyas ek aurat ka khud ko pahchanne aur apni khudi ko barakrar rakhne ki adbhut sangharsh-gatha hai. Ismen bahri aur andruni star par ghatnayen kuchh is kadar shaistgi se ghatti hain ki pathak chaunkta hai aur thaharkar sochne par vivash ho jata hai. Is upanyas mein sadiyon se prtiksharat is saval ka uttar talashne ki ek purzor koshish ki gai hai ki pati, patni aur vah ke prem trikon vale sambandhon mein sabse kamzor sthiti kiski hoti hai?
Apne svatv ki talash mein juti striyon ke bhatkav ki parinati se avgat karata ye upanyas stri-purush sambandhon ki bariki se padtal karta hai. Lekhika ne aurat se vyakti ban jane ki jaddojhad ko bahut hi sahaj bhasha mein abhivyakt karne ka upakram kiya hai. Katha-prvah aur pathniyta ki drishti se bhi ye ek ullekhniy kriti hai.