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Madhya Bharat Ke Pahaadi Elake

Capt. J. Forsith, Tr. Dinesh Malviya

Rs. 795 Rs. 708

‘मध्यभारत के पहाड़ी इलाक़े’ पुस्तक मध्यभारत के उन पहाड़ी और मैदानी इलाक़ों से हमारा साक्षात्कार कराती है जहाँ आदिवासियों की गहरी पैठ रही है। पुस्तक हमें बताती है कि आम तौर पर लोग भारत के ‘पहाड़ी’ और ‘मैदानी’ इलाक़ों की ही बात करते हैं। पहाड़ी इलाक़े से उनका अभिप्राय होता... Read More

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Description

‘मध्यभारत के पहाड़ी इलाक़े’ पुस्तक मध्यभारत के उन पहाड़ी और मैदानी इलाक़ों से हमारा साक्षात्कार कराती है जहाँ आदिवासियों की गहरी पैठ रही है।
पुस्तक हमें बताती है कि आम तौर पर लोग भारत के ‘पहाड़ी’ और ‘मैदानी’ इलाक़ों की ही बात करते हैं। पहाड़ी इलाक़े से उनका अभिप्राय होता है—मात्र हिमालय पर्वत शृंखला तथा मैदानी इलाक़े यानी बाक़ी देश। पृथ्वी पर बड़े-बड़े पर्वतों, जिन्हें ‘पहाड़’ से ज्‍़यादा कुछ नहीं कहा जाता, और तथाकथित ‘मैदानी’ इलाक़ों के बीच जो बहुत-सी ज़मीन पड़ी है, उसके लिए कोई निर्दिष्ट भौगोलिक नाम नहीं है।
प्रायद्वीप के दक्षिण में नीलगिरि नाम की पर्वत शृंखला है, जिसकी ऊँचाई 9000 फ़ीट है, लेकिन भारत से बाहर और भारत में भी इसे ऐसे इलाक़े के रूप में बहुत कम लोग जानते हैं, जो बीमार लोगों का आश्रय स्थल और विताप (जिसकी छाल से कुनैन बनती है) की नर्सरी है।
यह पुस्तक हमें उन स्थानों का भी भ्रमण कराती है, जहाँ पहुँचना मनुष्य के लिए लगभग दुष्कर है। इसमें नर्मदा घाटी, महादेव पर्वत, मूल जनजातियों, सन्‍त लिंगों का अवतरण, सागौन क्षेत्र, शेर, उच्चतर नर्मदा, साल वन आदि का भी विस्तार से वर्णन हुआ है।
प्रकृति-प्रेमियों, पर्यटकों तथा शोधकर्ताओं के लिए एक बेहद ज़रूरी पुस्तक। ‘madhybharat ke pahadi ilaqe’ pustak madhybharat ke un pahadi aur maidani ilaqon se hamara sakshatkar karati hai jahan aadivasiyon ki gahri paith rahi hai. Pustak hamein batati hai ki aam taur par log bharat ke ‘pahadi’ aur ‘maidani’ ilaqon ki hi baat karte hain. Pahadi ilaqe se unka abhipray hota hai—matr himalay parvat shrinkhla tatha maidani ilaqe yani baqi desh. Prithvi par bade-bade parvton, jinhen ‘pahad’ se ‍yada kuchh nahin kaha jata, aur tathakthit ‘maidani’ ilaqon ke bich jo bahut-si zamin padi hai, uske liye koi nirdisht bhaugolik naam nahin hai.
Prayadvip ke dakshin mein nilagiri naam ki parvat shrinkhla hai, jiski uunchai 9000 fit hai, lekin bharat se bahar aur bharat mein bhi ise aise ilaqe ke rup mein bahut kam log jante hain, jo bimar logon ka aashray sthal aur vitap (jiski chhal se kunain banti hai) ki narsri hai.
Ye pustak hamein un sthanon ka bhi bhrman karati hai, jahan pahunchana manushya ke liye lagbhag dushkar hai. Ismen narmda ghati, mahadev parvat, mul janjatiyon, san‍ta lingon ka avatran, sagaun kshetr, sher, uchchtar narmda, saal van aadi ka bhi vistar se varnan hua hai.
Prkriti-premiyon, paryatkon tatha shodhkartaon ke liye ek behad zaruri pustak.