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Kuthanv

Abdul Bismillah

Rs. 199 Rs. 177

‘कुठाँव’ में स्त्री और पुरुष का, प्रेम और वासना का, हिन्दू और मुसलमान का और ऊँची-नीची जातियों का एक भीषण परिदृश्य रचा गया है। अब्दुल बिस्मिल्लाह समाज और विशेष रूप से मुस्लिम समाज की आन्तरिक विडम्बनाओं और विसंगतियों को बख़ूबी चित्रित करते रहे हैं। इस उपन्यास में मेहतर समाज की... Read More

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Description

‘कुठाँव’ में स्त्री और पुरुष का, प्रेम और वासना का, हिन्दू और मुसलमान का और ऊँची-नीची जातियों का एक भीषण परिदृश्य रचा गया है। अब्दुल बिस्मिल्लाह समाज और विशेष रूप से मुस्लिम समाज की आन्तरिक विडम्बनाओं और विसंगतियों को बख़ूबी चित्रित करते रहे हैं। इस उपन्यास में मेहतर समाज की मुसलमान औरत इद्दन और उसकी बेटी सितारा है जो ऊँची जाति के, पैसेवाले मुस्लिम मर्दों से लोहा लेती हैं। स्त्री और पुरुष के और भी आमने-सामने के कई समीकरण यहाँ रचे गए हैं और यौन को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करके अपनी सामाजिक और मर्दाना प्रतिष्ठा को द्विगुणित करने के कुप्रयासों का भी निर्दयतापूर्वक भंडाफोड़ किया गया है। यह प्रश्न कि सदियों से ताक़त के क़ि‍स्म-क़िस्म के चौखटों में जकड़ी, लड़ती-भिड़ती और जीतती-हारती औरतों के लिए आख़िर मुक्ति की राह कहाँ है? इस सन्दर्भ में उपन्यास सपनों की अनन्त उड़ानों पर विराम लेता है। हम जान पाते हैं कि ये सपने ही हैं जो उन्हें अन्तत: मुक्ति की मंज़िल तक ले जाएँगे। तब न कोई अपनी दैहिक ताक़त से उन्हें परास्त कर पाएगा, न सामाजिक ताक़त से। ‘kuthanv’ mein stri aur purush ka, prem aur vasna ka, hindu aur musalman ka aur uunchi-nichi jatiyon ka ek bhishan paridrishya racha gaya hai. Abdul bismillah samaj aur vishesh rup se muslim samaj ki aantrik vidambnaon aur visangatiyon ko bakhubi chitrit karte rahe hain. Is upanyas mein mehtar samaj ki musalman aurat iddan aur uski beti sitara hai jo uunchi jati ke, paisevale muslim mardon se loha leti hain. Stri aur purush ke aur bhi aamne-samne ke kai samikran yahan rache ge hain aur yaun ko ek hathiyar ki tarah istemal karke apni samajik aur mardana pratishta ko dvigunit karne ke kupryason ka bhi nirdaytapurvak bhandaphod kiya gaya hai. Ye prashn ki sadiyon se taqat ke qi‍sm-qism ke chaukhton mein jakdi, ladti-bhidti aur jitti-harti aurton ke liye aakhir mukti ki raah kahan hai? is sandarbh mein upanyas sapnon ki anant udanon par viram leta hai. Hum jaan pate hain ki ye sapne hi hain jo unhen antat: mukti ki manzil tak le jayenge. Tab na koi apni daihik taqat se unhen parast kar payega, na samajik taqat se.

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