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Kuchh Din Aur

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‘कुछ दिन और’ निराशा के नहीं, आशा के भँवर में डूबते चले जाने की कहानी हैं—एक अन्धी आशा, जिसके पास न कोई तर्क है, न कोई तंत्र; बस, वह है अपने-आप में स्वायत्त। कहानी का नायक अपनी निष्क्रियता में जड़ हुआ, उसी की उँगली थामे चलता रहता है। धीरे-धीरे ज़िन्दगी... Read More

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Description

‘कुछ दिन और’ निराशा के नहीं, आशा के भँवर में डूबते चले जाने की कहानी हैं—एक अन्धी आशा, जिसके पास न कोई तर्क है, न कोई तंत्र; बस, वह है अपने-आप में स्वायत्त।
कहानी का नायक अपनी निष्क्रियता में जड़ हुआ, उसी की उँगली थामे चलता रहता है। धीरे-धीरे ज़िन्दगी के ऊपर से उसकी पकड़ छीजती चली जाती है। और, इस पूरी प्रक्रिया को झेलती है उसकी पत्नी—कभी अपने मन पर और कभी अपने शरीर पर। वह एक स्थगित जीवन जीनेवाले व्यक्ति की पत्नी है। इस तथ्य को धीरे-धीरे एक ठोस आकार देती हुई वह एक दिन पाती है कि इस लगातार विलम्बित आशा से कहीं ज़्यादा श्रेयस्कर एक ठोस निराशा है जहाँ से कम-से-कम कोई नई शुरुआत तो की जा सकती है। और, वह यही निर्णय करती है।
‘कुछ दिन और’ अत्यन्त सामान्य परिवेश में तलाश की गई एक विशिष्ट कहानी है, जिसे पढ़कर हम एकबारगी चौंक उठते हैं और देखते हैं कि हमारे आसपास बसे इन इतने शान्त और सामान्य घरों में भी तो कोई कहानी नहीं पल रही। ‘kuchh din aur’ nirasha ke nahin, aasha ke bhanvar mein dubte chale jane ki kahani hain—ek andhi aasha, jiske paas na koi tark hai, na koi tantr; bas, vah hai apne-ap mein svayatt. Kahani ka nayak apni nishkriyta mein jad hua, usi ki ungali thame chalta rahta hai. Dhire-dhire zindagi ke uupar se uski pakad chhijti chali jati hai. Aur, is puri prakriya ko jhelti hai uski patni—kabhi apne man par aur kabhi apne sharir par. Vah ek sthgit jivan jinevale vyakti ki patni hai. Is tathya ko dhire-dhire ek thos aakar deti hui vah ek din pati hai ki is lagatar vilambit aasha se kahin zyada shreyaskar ek thos nirasha hai jahan se kam-se-kam koi nai shuruat to ki ja sakti hai. Aur, vah yahi nirnay karti hai.
‘kuchh din aur’ atyant samanya parivesh mein talash ki gai ek vishisht kahani hai, jise padhkar hum ekbargi chaunk uthte hain aur dekhte hain ki hamare aaspas base in itne shant aur samanya gharon mein bhi to koi kahani nahin pal rahi.