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Jheeni-Jheeni Beeni Chadariya

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बनारस के साड़ी-बुनकरों पर केन्द्रित अब्दुल बिस्मिल्लाह का यह उपन्यास हिन्दी कथा-साहित्य में एक नये अनुभव-संसार को मूर्त करता है और इस अनुभव-संसार में साड़ी-बुनकरों की जिस अभावग्रस्त और रोग-जर्जर दुनिया में हम मतीन, अलीमुन और नन्हें इक़बाल के सहारे प्रवेश करते हैं, वहाँ मौजूद हैं रऊफ चचा, नजबुनिया, नसीबुन... Read More

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Description

बनारस के साड़ी-बुनकरों पर केन्द्रित अब्दुल बिस्मिल्लाह का यह उपन्यास हिन्दी कथा-साहित्य में एक नये अनुभव-संसार को मूर्त करता है और इस अनुभव-संसार में साड़ी-बुनकरों की जिस अभावग्रस्त और रोग-जर्जर दुनिया में हम मतीन, अलीमुन और नन्हें इक़बाल के सहारे प्रवेश करते हैं, वहाँ मौजूद हैं रऊफ चचा, नजबुनिया, नसीबुन बुआ, रेहाना, कमरुन, लतीफ, बशीर और अल्ताफ़ जैसे अनेक लोग, जो टूटते हुए भी साबुत हैं–हालात से समझौता नहीं करते, बल्कि उनसे लड़ना और उन्हें बदलना चाहते हैं और अन्ततः अपनी इस चाहत को जनाधिकारों के प्रति जागरूक अगली पीढ़ी के प्रतिनिधि इक़बाल को सौंप देते हैं। इस प्रक्रिया में लेखक ने शोषण के उस पूरे तंत्र को भी बारीकी से बेनकाब किया है जिसमें एक छोर पर है गिरस्ता और कोठीवाल, तो दूसरे छोर पर भ्रष्ट राजनीतिक हथकंडे और सरकार की तथाकथित कल्याणकारी योजनाएँ। साथ ही उसने बुनकर-बिरादरी के आर्थिक शोषण में सहायक उसी की अस्वस्थ परम्पराओं, सामाजिक कुरीतियों, मजहबी जड़वाद और साम्प्रदायिक नज़रिये को भी अनदेखा नहीं किया है। Banaras ke sadi-bunakron par kendrit abdul bismillah ka ye upanyas hindi katha-sahitya mein ek naye anubhav-sansar ko murt karta hai aur is anubhav-sansar mein sadi-bunakron ki jis abhavagrast aur rog-jarjar duniya mein hum matin, alimun aur nanhen iqbal ke sahare prvesh karte hain, vahan maujud hain rauph chacha, najabuniya, nasibun bua, rehana, kamrun, latiph, bashir aur altaf jaise anek log, jo tutte hue bhi sabut hain–halat se samjhauta nahin karte, balki unse ladna aur unhen badalna chahte hain aur antatः apni is chahat ko janadhikaron ke prati jagruk agli pidhi ke pratinidhi iqbal ko saump dete hain. Is prakriya mein lekhak ne shoshan ke us pure tantr ko bhi bariki se benkab kiya hai jismen ek chhor par hai girasta aur kothival, to dusre chhor par bhrasht rajnitik hathkande aur sarkar ki tathakthit kalyankari yojnayen. Saath hi usne bunkar-biradri ke aarthik shoshan mein sahayak usi ki asvasth parampraon, samajik kuritiyon, majahbi jadvad aur samprdayik nazariye ko bhi andekha nahin kiya hai.