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Jadoo Ka Kaleen

Rs. 95

राजनीतिक, प्रशासनिक भ्रष्टाचार के पूरे तंत्र को खोलनेवाला, बच्चों की चीख़-सा दर्दनाक नाटक ‘जादू का कालीन’ ‘ऐसा एक पेच है’ जहाँ सब मिलकर हमारी निर्ममता को बेनक़ाब करते हैं। इसमें पात्र बच्चे हैं पर नाटक वयस्कों के लिए है क्योंकि वही हैं जिन्हें इस निर्ममता का प्रतिकार करना है। सारी... Read More

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Description

राजनीतिक, प्रशासनिक भ्रष्टाचार के पूरे तंत्र को खोलनेवाला, बच्चों की चीख़-सा दर्दनाक नाटक ‘जादू का कालीन’ ‘ऐसा एक पेच है’ जहाँ सब मिलकर हमारी निर्ममता को बेनक़ाब करते हैं। इसमें पात्र बच्चे हैं पर नाटक वयस्कों के लिए है क्योंकि वही हैं जिन्हें इस निर्ममता का प्रतिकार करना है।
सारी विसंगति मानवीय विडम्बना, पाखंड के बीच मृदुला गर्ग ने फैंटेसी की लय को पकड़ा है। यह उनकी नाट्यकला का नमूना है कि वे निर्ममताओं के बीच बच्चों की उड़नछू प्रवृत्ति को नहीं भूलतीं। जिस कालीन को बुनना उनके शोषण का माध्यम है, बच्चे उसी को जादू का कालीन बतलाकर कहते हैं कि वे उस पर बैठकर उड़नछू हो जाएँगे। एक...दो...तीन उठमउठू : तीन...दो...एक भरनभरू : एक दो तीन...उड़नछू! यह गीत मुक्ति का मन्तर बन जाता है, जो पूरे नाटक में आशा के स्वर की तरह गूँजता है। नाटक में मृदुला जी ने लोक का कथात्मक स्वर भी बख़ूबी जोड़ा है। इस नाटक को 1993 में मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् का ‘सेठ गोविन्द दास पुरस्कार’ मिल चूका है। Rajnitik, prshasnik bhrashtachar ke pure tantr ko kholnevala, bachchon ki chikh-sa dardnak natak ‘jadu ka kalin’ ‘aisa ek pech hai’ jahan sab milkar hamari nirmamta ko benqab karte hain. Ismen patr bachche hain par natak vayaskon ke liye hai kyonki vahi hain jinhen is nirmamta ka pratikar karna hai. Sari visangati manviy vidambna, pakhand ke bich mridula garg ne phaintesi ki lay ko pakda hai. Ye unki natyakla ka namuna hai ki ve nirmamtaon ke bich bachchon ki udanchhu prvritti ko nahin bhultin. Jis kalin ko bunna unke shoshan ka madhyam hai, bachche usi ko jadu ka kalin batlakar kahte hain ki ve us par baithkar udanchhu ho jayenge. Ek. . . Do. . . Tin uthamauthu : tin. . . Do. . . Ek bharanabhru : ek do tin. . . Udanchhu! ye git mukti ka mantar ban jata hai, jo pure natak mein aasha ke svar ki tarah gunjata hai. Natak mein mridula ji ne lok ka kathatmak svar bhi bakhubi joda hai. Is natak ko 1993 mein madhya prdesh sahitya parishad ka ‘seth govind daas puraskar’ mil chuka hai.