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Hum Hushmat : Vol. 2

Rs. 650 Rs. 579

लगभग बीस बरसों बाद ‘हम हशमत– 2’ प्रस्तुत कर रही हैं कृष्णा सोबती। समकालीनों के संस्मरणों के बहाने, इस शती पर फैला हिन्दी साहित्य समाज, अपने वैचारिक और रचनात्मक विमर्श के साथ उजागर है। इस शताब्दी की प्रमुख हिन्दी साहित्यिक हस्तियाँ नामवर सिंह, अशोक वाजपेयी, अज्ञेय, अश्क, श्रीकान्त वर्मा, नेमिचन्द्र... Read More

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Description

लगभग बीस बरसों बाद ‘हम हशमत– 2’ प्रस्तुत कर रही हैं कृष्णा सोबती। समकालीनों के संस्मरणों के बहाने, इस शती पर फैला हिन्दी साहित्य समाज, अपने वैचारिक और रचनात्मक विमर्श के साथ उजागर है।
इस शताब्दी की प्रमुख हिन्दी साहित्यिक हस्तियाँ नामवर सिंह, अशोक वाजपेयी, अज्ञेय, अश्क, श्रीकान्त वर्मा, नेमिचन्द्र जैन, मंटो, अरविन्द कुमार, बलवन्त सिंह, राजेन्द्र सिंह बेदी, उमाशंकर जोशी, सत्येन कुमार, मंज़ूर एहतेशाम, सौमित्र मोहन, स्वदेश दीपक, प्रयाग शुक्ल, कमलेश्वर, नासिरा शर्मा और कन्हैयालाल नंदन मात्र फ़ोटोग्राफ़ी मुखाकृति में ही नहीं, बाक़ायदा अपनी-अपनी अदबी शख़्सियत में मौजूद हैं।
‘हम हशमत’ के पहले भाग में जो लेखक-गुच्छा प्रस्तुत किया गया था उसमें थे निर्मल वर्मा, भीष्म साहनी, कृष्ण बलदेव वैद, अमजद भट्टी, महेन्द्र भल्ला, गोविन्द मिश्र, मनोहर श्याम जोशी, नागार्जुन, शीला संधू, नितिन सेठी, रमेश पटेरिया, सुधीर पंत, मियाँ नसीरुद्दीन और सरदार जग्गा सिंह।
हिन्दी के सुधी पाठकों और आलोचकों ने ‘हम हशमत’ को संस्मरण विधा में मील का पत्थर माना था। ‘हम हशमत’ की विशेषता है तटस्थता। कृष्णा सोबती के भीतर पुख़्तगी से जमे ‘हशमत’ की सोच और उसके तेवर विलक्षण रूप से एक साथ दिलचस्प और गम्भीर हैं। नज़रिया ऐसा कि एक समय को साथ-साथ जीने के रिश्ते को निकटता से देखे और परिचय की दूरी को पाठ की बुनत और बनावट जज़्ब कर ले। ‘हशमत’ की औपचारिक निगाह में दोस्तों के लिए आदर है, जिज्ञासा है, जासूसी नहीं। यही निष्पक्षता नए-पुराने परिचय को घनत्व और लचक देती है और पाठ में साहित्यिक निकटता की दूरी को भी बरकरार रखती है।
‘हम हशमत’ हमारे समकालीन जीवन-फलक पर एक लम्बे आख्यान का प्रतिबिम्ब है। इसमें हर चित्र घटना है और हर चेहरा कथानायक। ‘हशमत’ की जीवन्तता और भाषायी चित्रात्मकता उन्हें कालजयी मुखड़े के स्थापत्य में स्थित कर देती है। Lagbhag bis barson baad ‘ham hashmat– 2’ prastut kar rahi hain krishna sobti. Samkalinon ke sansmarnon ke bahane, is shati par phaila hindi sahitya samaj, apne vaicharik aur rachnatmak vimarsh ke saath ujagar hai. Is shatabdi ki prmukh hindi sahityik hastiyan namvar sinh, ashok vajpeyi, agyey, ashk, shrikant varma, nemichandr jain, manto, arvind kumar, balvant sinh, rajendr sinh bedi, umashankar joshi, satyen kumar, manzur ehtesham, saumitr mohan, svdesh dipak, pryag shukl, kamleshvar, nasira sharma aur kanhaiyalal nandan matr fotografi mukhakriti mein hi nahin, baqayda apni-apni adbi shakhsiyat mein maujud hain.
‘ham hashmat’ ke pahle bhag mein jo lekhak-guchchha prastut kiya gaya tha usmen the nirmal varma, bhishm sahni, krishn baldev vaid, amjad bhatti, mahendr bhalla, govind mishr, manohar shyam joshi, nagarjun, shila sandhu, nitin sethi, ramesh pateriya, sudhir pant, miyan nasiruddin aur sardar jagga sinh.
Hindi ke sudhi pathkon aur aalochkon ne ‘ham hashmat’ ko sansmran vidha mein mil ka patthar mana tha. ‘ham hashmat’ ki visheshta hai tatasthta. Krishna sobti ke bhitar pukhtgi se jame ‘hashmat’ ki soch aur uske tevar vilakshan rup se ek saath dilchasp aur gambhir hain. Nazariya aisa ki ek samay ko sath-sath jine ke rishte ko nikatta se dekhe aur parichay ki duri ko path ki bunat aur banavat jazb kar le. ‘hashmat’ ki aupcharik nigah mein doston ke liye aadar hai, jigyasa hai, jasusi nahin. Yahi nishpakshta ne-purane parichay ko ghanatv aur lachak deti hai aur path mein sahityik nikatta ki duri ko bhi barakrar rakhti hai.
‘ham hashmat’ hamare samkalin jivan-phalak par ek lambe aakhyan ka pratibimb hai. Ismen har chitr ghatna hai aur har chehra kathanayak. ‘hashmat’ ki jivantta aur bhashayi chitratmakta unhen kalajyi mukhde ke sthapatya mein sthit kar deti hai.