BackBack
-11%

Hindi Sahitya Ka Samikshatmak Itihas

Rs. 400 Rs. 356

हिन्दी साहित्य में रीति काव्य, ख़ासतौर से केशव पर डॉ. विजयपाल सिंह की पुस्तकें अत्यन्त लोकप्रिय रही हैं। इस पुस्तक में उन्होंने असाधारण प्रवाह के साथ हिन्दी साहित्य के विभिन्न चरणों और प्रवृत्तियों का समीक्षात्मक अध्ययन किया है। अभी तक उपलब्ध विभिन्न विद्वानों द्वारा लिखे गए इतिहासों को ध्यान में... Read More

BlackBlack
Description

हिन्दी साहित्य में रीति काव्य, ख़ासतौर से केशव पर डॉ. विजयपाल सिंह की पुस्तकें अत्यन्त लोकप्रिय रही हैं। इस पुस्तक में उन्होंने असाधारण प्रवाह के साथ हिन्दी साहित्य के विभिन्न चरणों और प्रवृत्तियों का समीक्षात्मक अध्ययन किया है। अभी तक उपलब्ध विभिन्न विद्वानों द्वारा लिखे गए इतिहासों को ध्यान में रखते हुए तथा नए तथ्यों को समाहित करते हुए इस पुस्तक में उन्होंने प्रयास किया है कि आरम्भिक काल से लेकर आधुनिक साहित्य तक का विस्तारपूर्वक विवेचन प्रस्तुत किया जा सके।
लेखक ने इस कृति को ग्यारह खंडों में विभाजित किया है। खंडों का विभाजन साहित्येतिहास के आलोचकों, समीक्षकों तथा साहित्येतिहासकारों, अनुसन्धानों तथा टिप्पणियों के विश्लेषण और पुनर्मूल्यांकन के आधार पर किया गया है। लेखक ने डॉ. ग्रियर्सन, हजारीप्रसाद द्विवेदी, मिश्र-बन्धुओं, रामकुमार वर्मा, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, इडविन ग्रिब्ज जैसे विद्वानों द्वारा किए काल खंडों का भी पुनर्मूल्यांकन और विश्लेषण किया है।
पुस्तक के लेखन में विद्वान आलोचक ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि विद्वज्जनों के साथ-साथ यह पुस्तक छात्रों, शोधार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए भी सहज ग्राह्य हो। Hindi sahitya mein riti kavya, khastaur se keshav par dau. Vijaypal sinh ki pustken atyant lokapriy rahi hain. Is pustak mein unhonne asadharan prvah ke saath hindi sahitya ke vibhinn charnon aur prvrittiyon ka samikshatmak adhyyan kiya hai. Abhi tak uplabdh vibhinn vidvanon dvara likhe ge itihason ko dhyan mein rakhte hue tatha ne tathyon ko samahit karte hue is pustak mein unhonne pryas kiya hai ki aarambhik kaal se lekar aadhunik sahitya tak ka vistarpurvak vivechan prastut kiya ja sake. Lekhak ne is kriti ko gyarah khandon mein vibhajit kiya hai. Khandon ka vibhajan sahityetihas ke aalochkon, samikshkon tatha sahityetihaskaron, anusandhanon tatha tippaniyon ke vishleshan aur punarmulyankan ke aadhar par kiya gaya hai. Lekhak ne dau. Griyarsan, hajariprsad dvivedi, mishr-bandhuon, ramakumar varma, aacharya ramchandr shukl, idvin gribj jaise vidvanon dvara kiye kaal khandon ka bhi punarmulyankan aur vishleshan kiya hai.
Pustak ke lekhan mein vidvan aalochak ne is baat ka vishesh dhyan rakha hai ki vidvajjnon ke sath-sath ye pustak chhatron, shodharthiyon aur samanya pathkon ke liye bhi sahaj grahya ho.