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Hindi Kahani Ka Itihas : Vol. 2 (1951-1975)

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यह किताब हिन्दी कहानी का इतिहास का दूसरा खंड है। पहले खंड में 1900-1950 अवधि की हिन्दी कहानी का इतिहास प्रस्तुत किया गया था। इस खंड में 1951-75 का इतिहास पेश किया जा रहा है। पहले इरादा था कि दूसरे खंड में 1951-2000 की हिन्दी कहानी का इतिहास लिखा जाए।... Read More

Description

यह किताब हिन्दी कहानी का इतिहास का दूसरा खंड है। पहले खंड में 1900-1950 अवधि की हिन्दी कहानी का इतिहास प्रस्तुत किया गया था। इस खंड में 1951-75 का इतिहास पेश किया जा रहा है। पहले इरादा था कि दूसरे खंड में 1951-2000 की हिन्दी कहानी का इतिहास लिखा जाए। पर सामग्री की अधिकता के कारण यह इरादा बदलना पड़ा। यह भी महसूस हुआ कि 1975 का वर्ष हिन्दी कहानी में एक पड़ाव की तरह है। मोटामोटी रूप से इस वर्ष के आसपास अनेक पुराने और नए लेखकों का कहानी-लेखन या तो समाप्त हो गया या उसकी चमक समाप्त हो गई। जो हो, दूसरे खंड की अन्तिम सीमा के लिए एक बहाना तो मिल ही गया! कहने की जरूरत नहीं कि तीसरे खंड में 1976-2000 की कहानी का इतिहास प्रस्तुत करना अभिप्रेत है।
इस पुस्तक में उर्दू-हिन्दी और मैथिली-भोजपुरी-राजस्थानी के लगभग 300 कहानी लेखकों और 5000 से अधिक कहानियों का कमोबेश विस्तार के साथ विवेचन या उल्लेख किया गया है। कहानीकारों और किसी भी कारण चर्चित, उल्लेखनीय और श्रेष्ठ कहानियों की अक्षरानुक्रम सूची अनुक्रमणिका में दे दी गई है। हमारा यह दावा निराधार नहीं है कि इसके पहले किसी इतिहास-ग्रन्थ में इतनी संख्या में कहानीकारों और कहानियों का उल्लेख उपलब्ध नहीं है।
–भूमिका से Ye kitab hindi kahani ka itihas ka dusra khand hai. Pahle khand mein 1900-1950 avadhi ki hindi kahani ka itihas prastut kiya gaya tha. Is khand mein 1951-75 ka itihas pesh kiya ja raha hai. Pahle irada tha ki dusre khand mein 1951-2000 ki hindi kahani ka itihas likha jaye. Par samagri ki adhikta ke karan ye irada badalna pada. Ye bhi mahsus hua ki 1975 ka varsh hindi kahani mein ek padav ki tarah hai. Motamoti rup se is varsh ke aaspas anek purane aur ne lekhkon ka kahani-lekhan ya to samapt ho gaya ya uski chamak samapt ho gai. Jo ho, dusre khand ki antim sima ke liye ek bahana to mil hi gaya! kahne ki jarurat nahin ki tisre khand mein 1976-2000 ki kahani ka itihas prastut karna abhipret hai. Is pustak mein urdu-hindi aur maithili-bhojapuri-rajasthani ke lagbhag 300 kahani lekhkon aur 5000 se adhik kahaniyon ka kamobesh vistar ke saath vivechan ya ullekh kiya gaya hai. Kahanikaron aur kisi bhi karan charchit, ullekhniy aur shreshth kahaniyon ki akshranukram suchi anukramanika mein de di gai hai. Hamara ye dava niradhar nahin hai ki iske pahle kisi itihas-granth mein itni sankhya mein kahanikaron aur kahaniyon ka ullekh uplabdh nahin hai.
–bhumika se