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Hatya Aur Atamhatya Ke Beech Mariya

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इस किताब का आधारभूत उद्‌देश्य हिंसा अपराधों के पीछे छिपे मनोविज्ञान को समझना है जो सबसे कम बिगड़े तथा भारतीय आदिवासियों में श्रेष्ठ प्रजाति के लोगों द्वारा किए जाते हैं, तथा वे परिस्थितियाँ जो यहाँ के आदमी, औरतों को आत्महत्या करने के लिए उकसाती हैं। ऐसी कृति तथा शोधकार्य उन... Read More

Description

इस किताब का आधारभूत उद्‌देश्य हिंसा अपराधों के पीछे छिपे मनोविज्ञान को समझना है जो सबसे कम बिगड़े तथा भारतीय आदिवासियों में श्रेष्ठ प्रजाति के लोगों द्वारा किए जाते हैं, तथा वे परिस्थितियाँ जो यहाँ के आदमी, औरतों को आत्महत्या करने के लिए उकसाती हैं।
ऐसी कृति तथा शोधकार्य उन आदिवासियों को, जो जजों तथा मजिस्ट्रेटों द्वारा अपराधी करार दिए जाते हैं, सावधानी तथा बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से समझने तथा उनके साथ सलूक करने के लिए मार्गदर्शन दे सकते हैं। यह कृति निश्चित रूप से दंडित करने तथा आदिवासी कैदियों के साथ जेल में किए जानेवाले व्यवहार पर भी प्रश्न उठाती है।
इस किताब के शुरुआती पृष्ठों में मारिया जीवन की विविधता को सारांश में बतलाया गया है। इस संक्षिप्तता में ही उनके अनेक विविध पक्षों को उजागर किया गया है। यह किताब अपराधों के अध्ययन की अपेक्षा सामाजिक नृतत्त्व विज्ञान के लिए एक अमूल्य योगदान है। Is kitab ka aadharbhut ud‌deshya hinsa apradhon ke pichhe chhipe manovigyan ko samajhna hai jo sabse kam bigde tatha bhartiy aadivasiyon mein shreshth prjati ke logon dvara kiye jate hain, tatha ve paristhitiyan jo yahan ke aadmi, aurton ko aatmhatya karne ke liye uksati hain. Aisi kriti tatha shodhkarya un aadivasiyon ko, jo jajon tatha majistreton dvara apradhi karar diye jate hain, savdhani tatha buddhimattapurn dhang se samajhne tatha unke saath saluk karne ke liye margdarshan de sakte hain. Ye kriti nishchit rup se dandit karne tatha aadivasi kaidiyon ke saath jel mein kiye janevale vyavhar par bhi prashn uthati hai.
Is kitab ke shuruati prishthon mein mariya jivan ki vividhta ko saransh mein batlaya gaya hai. Is sankshiptta mein hi unke anek vividh pakshon ko ujagar kiya gaya hai. Ye kitab apradhon ke adhyyan ki apeksha samajik nritattv vigyan ke liye ek amulya yogdan hai.