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Hariya Harquelize Ki Hairani

Rs. 75

पहले बिरादरी को हैरानी हुआ करती थी कि हरिया को किसी बात से हैरानी क्यों नहीं होती, लेकिन अचानक हरिया के सामने हैरानी का दरवाज़ा जो खुला तो वह हैरानी के तिलिस्म में उतरता ही चला गया। यहाँ तक कि बिरादरी की हैरानियों पर भारी पड़ने लगा। हैरानी को लेकर... Read More

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Description

पहले बिरादरी को हैरानी हुआ करती थी कि हरिया को किसी बात से हैरानी क्यों नहीं होती, लेकिन अचानक हरिया के सामने हैरानी का दरवाज़ा जो खुला तो वह हैरानी के तिलिस्म में उतरता ही चला गया। यहाँ तक कि बिरादरी की हैरानियों पर भारी पड़ने लगा। हैरानी को लेकर जितनी व्याख्याएँ लोगों के पास थीं, वे कहानियों की शक्ल में बहने लगीं। और तब सवाल उठा इन कहानियों को सुरक्षित रखने, बिरादरी के विरसे में शामिल करने का। बुज़़ुर्गों को चिन्ता हुई कि कहीं ये कहानियाँ आपस ही में टकराकर ख़त्म न हो जाएँ। लेकिन बिरादरी के एक मेधावी युवक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि हरिया की हैरानी हमेशा रहेगी क्योंकि हैरानी के बिना कहानी नहीं होती और कहानी के बिना बिरादरी नहीं होती।
जोशी जी के अद्भुत शिल्प और कथा-कौशल की नुमाइंदगी करता हुआ एक अलग ढंग का उपन्यास। Pahle biradri ko hairani hua karti thi ki hariya ko kisi baat se hairani kyon nahin hoti, lekin achanak hariya ke samne hairani ka darvaza jo khula to vah hairani ke tilism mein utarta hi chala gaya. Yahan tak ki biradri ki hairaniyon par bhari padne laga. Hairani ko lekar jitni vyakhyayen logon ke paas thin, ve kahaniyon ki shakl mein bahne lagin. Aur tab saval utha in kahaniyon ko surakshit rakhne, biradri ke virse mein shamil karne ka. Buzurgon ko chinta hui ki kahin ye kahaniyan aapas hi mein takrakar khatm na ho jayen. Lekin biradri ke ek medhavi yuvak ne unhen bharosa dilaya ki hariya ki hairani hamesha rahegi kyonki hairani ke bina kahani nahin hoti aur kahani ke bina biradri nahin hoti. Joshi ji ke adbhut shilp aur katha-kaushal ki numaindgi karta hua ek alag dhang ka upanyas.