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Gondvana Ki Lokkathayen

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आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रति रुचि जाग्रत करने हेतु रोचक साहित्य उपलब्ध कराया जाता रहा है। उसी शृंखला में बैगा एवं गोंड जनजातियों की बहुचर्चित लोककथाओं के संग्रह को यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है। गोंड तथा बैगा जनजाति के अनेक पहलू अभी भी शेष समाज के लिए अविदित... Read More

Description

आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रति रुचि जाग्रत करने हेतु रोचक साहित्य उपलब्ध कराया जाता रहा है। उसी शृंखला में बैगा एवं गोंड जनजातियों की बहुचर्चित लोककथाओं के संग्रह को यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है।
गोंड तथा बैगा जनजाति के अनेक पहलू अभी भी शेष समाज के लिए अविदित हैं। इनकी प्रथाएँ, परम्पराएँ, धार्मिक आस्थाएँ, कला, लोक-नृत्य एवं संगीत आदि हममें न केवल कौतूहल उत्पन्न करते हैं, बल्कि हमें आह्लादित भी करते हैं। इनके साथ-साथ इस जनजाति के पास विशिष्ट लोककथाओं, गाथाओं, किंवदन्तियों एवं मिथकों आदि का भी विपुल भंडार है जो एक धरोहर के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तान्तरित होते हुए सदियों से अक्षुण्ण चला आ रहा है। इनकी कथाओं में जहाँ समाज के स्वरूप, संगठन एवं सामाजिक आस्थाओं के दर्शन होते हैं, वहीं ये व्यक्ति व समाज को सृष्टि तथा सृष्टि के रचयिता के साथ भी जोड़ती हैं।
गोंड एवं बैगा जनजाति की लोककथाओं के अकूत भंडार में से कुछ रोचक लोककथाएँ यहाँ प्रस्तुत की जा रही हैं। यह कार्य भरपूर परिश्रम, अनन्य आस्था और परिपूर्ण शोधवृत्ति से किया गया है। आशा है, जनजातीय संस्कृति में रुचि रखनेवालों और सुधी पाठकों को यह प्रयास अवश्य पसन्द आएगा। Aadivasi anchlon mein shiksha ke prati ruchi jagrat karne hetu rochak sahitya uplabdh karaya jata raha hai. Usi shrinkhla mein baiga evan gond janjatiyon ki bahucharchit lokakthaon ke sangrah ko yahan prkashit kiya ja raha hai. Gond tatha baiga janjati ke anek pahlu abhi bhi shesh samaj ke liye avidit hain. Inki prthayen, paramprayen, dharmik aasthaen, kala, lok-nritya evan sangit aadi hammen na keval kautuhal utpann karte hain, balki hamein aahladit bhi karte hain. Inke sath-sath is janjati ke paas vishisht lokakthaon, gathaon, kinvdantiyon evan mithkon aadi ka bhi vipul bhandar hai jo ek dharohar ke rup mein pidhi-dar-pidhi hastantrit hote hue sadiyon se akshunn chala aa raha hai. Inki kathaon mein jahan samaj ke svrup, sangthan evan samajik aasthaon ke darshan hote hain, vahin ye vyakti va samaj ko srishti tatha srishti ke rachayita ke saath bhi jodti hain.
Gond evan baiga janjati ki lokakthaon ke akut bhandar mein se kuchh rochak lokakthayen yahan prastut ki ja rahi hain. Ye karya bharpur parishram, ananya aastha aur paripurn shodhvritti se kiya gaya hai. Aasha hai, janjatiy sanskriti mein ruchi rakhnevalon aur sudhi pathkon ko ye pryas avashya pasand aaega.