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Gandhi Ki Mezbani

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महात्मा गांधी के अपने विपुल साहित्य और लेखन के अलावा उन पर लिखी गई सामग्री भी विपुल है। फिर भी उन्हें और नज़दीक से जानने-समझने की इच्छा भी शिथिल नहीं पड़ती। उनके समकालीनों के अनेक संस्मरणों में गांधी जी जब-तब सजीव होते रहते हैं। ऐसी ही एक पुस्तक बीसवीं शताब्दी... Read More

Description

महात्मा गांधी के अपने विपुल साहित्य और लेखन के अलावा उन पर लिखी गई सामग्री भी विपुल है। फिर भी उन्हें और नज़दीक से जानने-समझने की इच्छा भी शिथिल नहीं पड़ती। उनके समकालीनों के अनेक संस्मरणों में गांधी जी जब-तब सजीव होते रहते हैं। ऐसी ही एक पुस्तक बीसवीं शताब्दी के चौथे दशक में एक अंग्रेज़ महिला ने प्रकाशित की थी जिन्होंने कुछ समय के लिए गांधी जी की मेज़बानी की थी। उसमें इस अनोखे व्यक्ति की सहज मानवीयता, आत्मविश्वास, अपनी दृष्टि और मूल्यों पर हर हालत में अड़े रहने के प्रसंग सहज प्रवाह में आए हैं। एक ऐसे समय में जब हम पश्चिम के आतंक और अनुकरण में मुदित मन लगे हैं, यह पुस्तक उस आतंक से सर्वथा मुक्त एक भारतीय आत्मा को एक बार फिर सामने लाती है और उसका हिन्दी अनुवाद प्रकाशित करते हुए हमें प्रसन्नता है।
—अशोक वाजपेयी Mahatma gandhi ke apne vipul sahitya aur lekhan ke alava un par likhi gai samagri bhi vipul hai. Phir bhi unhen aur nazdik se janne-samajhne ki ichchha bhi shithil nahin padti. Unke samkalinon ke anek sansmarnon mein gandhi ji jab-tab sajiv hote rahte hain. Aisi hi ek pustak bisvin shatabdi ke chauthe dashak mein ek angrez mahila ne prkashit ki thi jinhonne kuchh samay ke liye gandhi ji ki mezbani ki thi. Usmen is anokhe vyakti ki sahaj manviyta, aatmvishvas, apni drishti aur mulyon par har halat mein ade rahne ke prsang sahaj prvah mein aae hain. Ek aise samay mein jab hum pashchim ke aatank aur anukran mein mudit man lage hain, ye pustak us aatank se sarvtha mukt ek bhartiy aatma ko ek baar phir samne lati hai aur uska hindi anuvad prkashit karte hue hamein prsannta hai. —ashok vajpeyi