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Ek Hee Chehra Thaa Ghar Main

Khushbir Singh Shaad

Rs. 295.00

कहने को एक आईना टूट बिखर गया लेकिन मिरे वजूद को किरचों से भर गया मैं जाने किस ख़याल के तनहा सफ़र में था अपने आहूत करीब से होकर गुज़र गया इक आशना से दर्द ने चौंका दिया मुझे मैं तो समझ रहा था मिरा ज़ख्म भर गया शायद कि... Read More

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Description
कहने को एक आईना टूट बिखर गया लेकिन मिरे वजूद को किरचों से भर गया मैं जाने किस ख़याल के तनहा सफ़र में था अपने आहूत करीब से होकर गुज़र गया इक आशना से दर्द ने चौंका दिया मुझे मैं तो समझ रहा था मिरा ज़ख्म भर गया शायद कि इन्तजार इसी पल का था उसे कश्ती के डूबते ही वो दरिया उतर गया मुद्दत से उसकी छाँव में बैठा नहीं कोई इस सायादार पेड़ इसी ग़म में मर गया खुशबीर सिंह 'शाद' का कलाम उर्दू के अदबी हलकों में दिलचस्पी से पढ़ा जा रहा है। एक ज़माना था जब मुशायरों में कुबूले-आम मेयार की सनद हुआ करता था लेकिन अगर किसी का क़लाम समाईन को भी मुतासिर करें और क़ारीन को भी मुतवज्जा करने में कामयाब हो तो उसका इस्हाक़ मुसल्लम हो जाता है। - गोपीचंद नारंग