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Dastan Aur Bhi Hain

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शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के संस्थापक नेताओं में अग्रणी थे। वे दो बार स्वतंत्र बांग्लादेश के राष्ट्रपति भी रहे। यह पुस्तक बंगबन्धु के रूप में सम्मानित-स्वीकृत शेख मुजीबुर रहमान की आत्मकथा है, जिसे उन्होंने अपने कारावास के दिनों में लिखी थी। इसमें उन्होंने अपने 1955 तक के निजी और सार्वजनिक... Read More

Description

शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के संस्थापक नेताओं में अग्रणी थे। वे दो बार स्वतंत्र बांग्लादेश के राष्ट्रपति भी रहे।
यह पुस्तक बंगबन्धु के रूप में सम्मानित-स्वीकृत शेख मुजीबुर रहमान की आत्मकथा है, जिसे उन्होंने अपने कारावास के दिनों में लिखी थी। इसमें उन्होंने अपने 1955 तक के निजी और सार्वजनिक जीवन का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है।
इस पुस्तक से ज़ाहिर होता है कि एक सच्चे जननेता के रूप में उनकी हैसियत कितनी ऊँची थी। अपने देश और अपने लोगों के लिए उन्होंने अपने जीवन को जोखिम में डालकर संघर्ष का एक ऊँचा उदाहरण पेश किया।
प्रथम दृष्ट्या तथ्यों पर आधारित इस आत्मकथा में हमें भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन की कुछ झलकियों के अलावा पाकिस्तान आन्दोलन, भाषा आन्दोलन, बांग्लादेश की स्वाधीनता के आन्दोलन और इसके दौरान पाकिस्तानी शासन द्वारा किए गए षड्यंत्रों और दमन से सम्बन्धित अनेक दुर्लभ ऐतिहासिक तथ्यों और कहानियों की जानकारी मिलेगी।
कई वर्षों तक अनुपलब्ध रही इस आत्मकथा को सामने लाने का श्रेय उनकी पुत्री शेख हसीना और उनके अन्य परिजनों को जाता है जिन्होंने अत्यन्त परिश्रम के साथ जर्जर, खस्ताहाल काग़ज़ों में से इस दस्तावेज़ को सम्भव किया। Shekh mujibur rahman bangladesh ke sansthapak netaon mein agrni the. Ve do baar svtantr bangladesh ke rashtrapati bhi rahe. Ye pustak bangbandhu ke rup mein sammanit-svikrit shekh mujibur rahman ki aatmaktha hai, jise unhonne apne karavas ke dinon mein likhi thi. Ismen unhonne apne 1955 tak ke niji aur sarvajnik jivan ka lekha-jokha prastut kiya hai.
Is pustak se zahir hota hai ki ek sachche janneta ke rup mein unki haisiyat kitni uunchi thi. Apne desh aur apne logon ke liye unhonne apne jivan ko jokhim mein dalkar sangharsh ka ek uuncha udahran pesh kiya.
Prtham drishtya tathyon par aadharit is aatmaktha mein hamein bhartiy svtantrta aandolan ki kuchh jhalakiyon ke alava pakistan aandolan, bhasha aandolan, bangladesh ki svadhinta ke aandolan aur iske dauran pakistani shasan dvara kiye ge shadyantron aur daman se sambandhit anek durlabh aitihasik tathyon aur kahaniyon ki jankari milegi.
Kai varshon tak anuplabdh rahi is aatmaktha ko samne lane ka shrey unki putri shekh hasina aur unke anya parijnon ko jata hai jinhonne atyant parishram ke saath jarjar, khastahal kagzon mein se is dastavez ko sambhav kiya.