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Chaturi Chamar

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चतुरी चमार में निराला ने विषयवस्तु के अनुरूप ही कहानी का नया रूप आविष्कृत किया है। वे कई बार संस्मरणात्मक ढंग से अपनी बात कहते हैं और अन्त में अपनी कूची के एक स्पर्श से संस्मरण को कहानी में बदल देते हैं। इन कहानियों में उनका गद्य अनावश्यक साज-सँवार से... Read More

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Description

चतुरी चमार में निराला ने विषयवस्तु के अनुरूप ही कहानी का नया रूप आविष्कृत किया है। वे कई बार संस्मरणात्मक ढंग से अपनी बात कहते हैं और अन्त में अपनी कूची के एक स्पर्श से संस्मरण को कहानी में बदल देते हैं। इन कहानियों में उनका गद्य अनावश्यक साज-सँवार से मुक्त होकर नई दीप्ति के साथ सामने आया है। इसमें जितना कसाव है, उतना ही पैनापन भी। इस कहानी-संग्रह में हास्य के कल-कल के नीचे प्राय: करुणा और आक्रोश की धारा बहती रहती है। संक्षेप में कहें तो निराला के विद्रोही तेवर और गलत सामाजिक मान्यताओं पर उनके तीखे प्रहारों ने इस छोटे से संग्रह को हिन्दी साहित्य में बेमिसाल बना दिया है। Chaturi chamar mein nirala ne vishayvastu ke anurup hi kahani ka naya rup aavishkrit kiya hai. Ve kai baar sansmarnatmak dhang se apni baat kahte hain aur ant mein apni kuchi ke ek sparsh se sansmran ko kahani mein badal dete hain. In kahaniyon mein unka gadya anavashyak saj-sanvar se mukt hokar nai dipti ke saath samne aaya hai. Ismen jitna kasav hai, utna hi painapan bhi. Is kahani-sangrah mein hasya ke kal-kal ke niche pray: karuna aur aakrosh ki dhara bahti rahti hai. Sankshep mein kahen to nirala ke vidrohi tevar aur galat samajik manytaon par unke tikhe prharon ne is chhote se sangrah ko hindi sahitya mein bemisal bana diya hai.