BackBack
-11%

Bazar Ke Bazigar

Rs. 295 Rs. 263

कहिए कि हिन्दी सिनेमा का नया सुनहरा दौर शुरू हो चुका है। एक बिलकुल नई जगमगाती पीढ़ी समूचे परिदृश्य पर क़ब्ज़ा जमा चुकी है। उसने तमाम शक-शुब्‍हा नेस्तनाबूद कर अपनी फ़िल्मों में लोकप्रिय चरित्रों की ऐसी बुनियादें डाली हैं जिसने बीसवीं शताब्दी के तमाम प्रतिमानों की चूलें हिला दी हैं।... Read More

BlackBlack
Description

कहिए कि हिन्दी सिनेमा का नया सुनहरा दौर शुरू हो चुका है। एक बिलकुल नई जगमगाती पीढ़ी समूचे परिदृश्य पर क़ब्ज़ा जमा चुकी है।
उसने तमाम शक-शुब्‍हा नेस्तनाबूद कर अपनी फ़िल्मों में लोकप्रिय चरित्रों की ऐसी बुनियादें डाली हैं जिसने बीसवीं शताब्दी के तमाम प्रतिमानों की चूलें हिला दी हैं।
स्थापित प्रतिमानों को ख़ारिज करने की जहमत उठाने में इसकी कोई रुचि नहीं है।
वह उन प्रतिमानों को अपने दौर के साथ खड़ा करती है। और उनसे एक क़दम आगे जाकर। कई मायनों में सौ क़दम पीछे रहते हुए भी। वह जिसे प्रथम पुरुष कहा जाता है, कोई चालीस साल बाद अपनी किताबी ज़ुबान की चौहद्दी से बाहर निकला है। आज आशुतोष गोवारीकर, संजय लीला भंसाली, मधुर भंडारकर, राजकुमार हीरानी, करन जौहर और आदित्य चोपड़ा उन फ़िल्मकारों के नाम हैं जिनकी फ़िल्में सिर्फ़ सितारों के नाम से नहीं पहचानी जातीं।
आज फिर परिदृश्य सुनहरे दौर की तरह ही भरा-पूरा है। इसमें कोई शक नहीं कि यह
एक नए सुनहरे दौर की शुरुआत है।
लेकिन बस शुरुआत। Kahiye ki hindi sinema ka naya sunahra daur shuru ho chuka hai. Ek bilkul nai jagamgati pidhi samuche paridrishya par qabza jama chuki hai. Usne tamam shak-shub‍ha nestnabud kar apni filmon mein lokapriy charitron ki aisi buniyaden dali hain jisne bisvin shatabdi ke tamam pratimanon ki chulen hila di hain.
Sthapit pratimanon ko kharij karne ki jahmat uthane mein iski koi ruchi nahin hai.
Vah un pratimanon ko apne daur ke saath khada karti hai. Aur unse ek qadam aage jakar. Kai maynon mein sau qadam pichhe rahte hue bhi. Vah jise prtham purush kaha jata hai, koi chalis saal baad apni kitabi zuban ki chauhaddi se bahar nikla hai. Aaj aashutosh govarikar, sanjay lila bhansali, madhur bhandarkar, rajakumar hirani, karan jauhar aur aaditya chopda un filmkaron ke naam hain jinki filmen sirf sitaron ke naam se nahin pahchani jatin.
Aaj phir paridrishya sunahre daur ki tarah hi bhara-pura hai. Ismen koi shak nahin ki ye
Ek ne sunahre daur ki shuruat hai.
Lekin bas shuruat.

Additional Information
Color

Black

Publisher
Language
ISBN
Pages
Publishing Year