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Agneya Varsh

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‘आग्नेय वर्ष’ फ़ेदिन की प्रसिद्ध उपन्यास-त्रयी के पहले उपन्यास ‘पहली उमंगें’ के पात्रों से हम जहाँ विदा लेते हैं, उसके कई वर्ष बाद, अक्टूबर क्रान्ति के भी दो वर्ष बाद, हमारी मुलाक़ात फिर उन्हीं पात्रों से एकदम नए परिवेश में होती है—‘आग्नेय वर्ष’ उपन्यास में। उपन्यास की शुरुआत में एक... Read More

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Description

‘आग्नेय वर्ष’ फ़ेदिन की प्रसिद्ध उपन्यास-त्रयी के पहले उपन्यास ‘पहली उमंगें’ के पात्रों से हम जहाँ विदा लेते हैं, उसके कई वर्ष बाद, अक्टूबर क्रान्ति के भी दो वर्ष बाद, हमारी मुलाक़ात फिर उन्हीं पात्रों से एकदम नए परिवेश में होती है—‘आग्नेय वर्ष’ उपन्यास में। उपन्यास की शुरुआत में एक रूसी सैनिक जर्मन युद्धबन्दी शिविर से भागकर रूस पहुँचता है जहाँ क्रान्ति के बाद गृहयुद्ध की आग धधक रही है। लौटनेवालों में इज्वेकोव और रागोजिन भी हैं। सरातोव में उनकी मुलाक़ात पुराने दोस्तों और दुश्मनों से होती है। युद्ध और क्रान्ति के गुज़रे हुए दिनों ने सबके जीवन पर अलग-अलग ढंग से अमिट छापें छोड़ी हैं। उपन्यास में रागोजिन और इज्वेकोव—एक मज़दूर और एक बुद्धिजीवी बोल्शेविक का अन्तर्भेदी चित्रण प्रस्तुत किया गया है। दोनों ही एक शक्तिशाली ऐतिहासिक आन्दोलन की उपज हैं और नेता भी। दोनों ऐसे इंसान हैं जिनकी गहन-गम्भीर आन्तरिक दुनिया का उन अभूतपूर्व सामाजिक कार्यभारों के साथ पूरा सामंजस्य है, जो उनके सामने खड़े हैं। उपन्यास कला की दुनिया के उन बुद्धिजीवी सदस्यों का भी जीवन्त चित्र उपस्थित करता है जो स्वयं को वर्ग-पूर्वाग्रहों से मुक्त करते हैं और नए रूस के जीवन में भागीदारी करते हैं। ‘agney varsh’ fedin ki prsiddh upanyas-tryi ke pahle upanyas ‘pahli umangen’ ke patron se hum jahan vida lete hain, uske kai varsh baad, aktubar kranti ke bhi do varsh baad, hamari mulaqat phir unhin patron se ekdam ne parivesh mein hoti hai—‘agney varsh’ upanyas mein. Upanyas ki shuruat mein ek rusi sainik jarman yuddhbandi shivir se bhagkar rus pahunchata hai jahan kranti ke baad grihyuddh ki aag dhadhak rahi hai. Lautnevalon mein ijvekov aur ragojin bhi hain. Saratov mein unki mulaqat purane doston aur dushmnon se hoti hai. Yuddh aur kranti ke guzre hue dinon ne sabke jivan par alag-alag dhang se amit chhapen chhodi hain. Upanyas mein ragojin aur ijvekov—ek mazdur aur ek buddhijivi bolshevik ka antarbhedi chitran prastut kiya gaya hai. Donon hi ek shaktishali aitihasik aandolan ki upaj hain aur neta bhi. Donon aise insan hain jinki gahan-gambhir aantrik duniya ka un abhutpurv samajik karybharon ke saath pura samanjasya hai, jo unke samne khade hain. Upanyas kala ki duniya ke un buddhijivi sadasyon ka bhi jivant chitr upasthit karta hai jo svayan ko varg-purvagrhon se mukt karte hain aur ne rus ke jivan mein bhagidari karte hain.