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Waiting Mother Aur Prem Kahaniyan

Manjula Rana

Rs. 295.00

मेरी संवेदनाओं में समकालीन जीवन की सम्पूर्ण व्यथा-कथा के साथ इन सबको स्वीकार कर ऊपर उठने का आग्रह है फिर चाहे यह चिन्ता किसी स्त्री की हो या पुरुष की। इन कहानियों में सृजनात्मकता का भाव है किसी उत्पादन का नहीं इसीलिए समय की तपिश और अनुभव की मार्मिकता के... Read More

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Description
मेरी संवेदनाओं में समकालीन जीवन की सम्पूर्ण व्यथा-कथा के साथ इन सबको स्वीकार कर ऊपर उठने का आग्रह है फिर चाहे यह चिन्ता किसी स्त्री की हो या पुरुष की। इन कहानियों में सृजनात्मकता का भाव है किसी उत्पादन का नहीं इसीलिए समय की तपिश और अनुभव की मार्मिकता के साथ शब्दों को बरतने का सलीका भी देखने को मिलता है। बिना किसी पूर्वाग्रह के ये मन की भट्ठी के ताप से सराबोर हैं। मानवीय करुणा और सक्रिय प्रतिरोध के साथ इनमें स्त्री बनाम पुरुष की बेमानी बहस की कोई जगह नहीं है वरन् स्त्री-मन के उस नायाब कोने पर दस्तक अवश्य दी गयी है, जहाँ बिना किसी हस्तक्षेप के वह अपनी सलोनी लुनाई के साथ पेश आती है। यह प्रचलित धारणाओं से बाहर की सच्चाई है। प्रेम का यह अधिकार समस्त सामाजिक वर्जनाओं के बावजूद पूरी शिद्दत के साथ स्त्री को देना एक हीरक गवाक्ष खोलने के सदृश्य है और यह साहस इन कहानियों का मुख्य स्वर है। पहाड़ की पीड़ा को पीठ पर लादे किन्तु शर्त मुस्कुराने की हो या सामाजिक कुरीतियों का बोझा ढोती परिस्थितियाँ हों अथवा अनमेल विवाह के साथ संस्कारों के आवरण में लिपटी नारी का उजला चित्र हो, अपने समय की विभीषिकाओं से बराबर रू-ब-रू होती और उनसे जूझते हुए जीवन का उजास पूरी बेबाकी के साथ प्रस्तुत किया गया है। मानव मन की विजय यात्रा का जयघोष करती ये कहानियाँ दुनिया से जद्दोजहद करके आत्मीयता के अहसास की शैलीगत अभिव्यंजना हैं।