BackBack

Vibhishan Ki Anuchinta

Anil Puroshit

Rs. 200.00

युद्ध विध्वस्त देश, समाज और युग के लिए पुनर्विन्यास एक दुरूह दायित्व रहा है। विश्वयुद्ध से भी भयानक विनाश विभीषण देखता है। अपने इस उद्यम में वह सबका सहयोग व समर्थन लेता है। सबकी सुनकर निर्माण में जुटता है। अग्रज द्वारा ठुकराने पर वह और उसके सारे समर्थक चले जाते... Read More

BlackBlack
Description
युद्ध विध्वस्त देश, समाज और युग के लिए पुनर्विन्यास एक दुरूह दायित्व रहा है। विश्वयुद्ध से भी भयानक विनाश विभीषण देखता है। अपने इस उद्यम में वह सबका सहयोग व समर्थन लेता है। सबकी सुनकर निर्माण में जुटता है। अग्रज द्वारा ठुकराने पर वह और उसके सारे समर्थक चले जाते हैं। नये मानव-मूल्यों की नींव, जीवन विश्वास और सद्भाव की नींव पर नये समाज के गठन का संकल्प लेता है विभीषण। इसी की आधारभूमि है यह अनुचिन्तन।