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Urdu Ka Arambhik Yug

Rs. 495

उर्दू भाषा की उत्पत्ति दिल्ली के आसपास हुई, लेकिन आरम्भ में इसमें साहित्य की पैदावार गुजरात और दकन में हुई। ऐसा क्यों हुआ, इस पर इस पुस्तक में प्रकाश डाला गया है। फिर गुजरात और दकन में सैद्धान्तिक आलोचना और काव्यशास्त्र के उदय तथा इस सिलसिले में अमीर खुसरो और... Read More

Description

उर्दू भाषा की उत्पत्ति दिल्ली के आसपास हुई, लेकिन आरम्भ में इसमें साहित्य की पैदावार गुजरात और दकन में हुई। ऐसा क्यों हुआ, इस पर इस पुस्तक में प्रकाश डाला गया है। फिर गुजरात और दकन में सैद्धान्तिक आलोचना और काव्यशास्त्र के उदय तथा इस सिलसिले में अमीर खुसरो और संस्कृत की केन्द्रीय भूमिका को भी इसमें रेखांकित किया गया है। इसके अलावा इस पुस्तक में जिन विषयों की जाँच-पड़ताल की गई है, वे हैं : दिल्ली का साहित्यिक परिप्रेक्ष्य पर देर से प्रकट होना, दिल्ली के साहित्यिक साम्राज्यवादी स्वभाव के कारण ग़ैर दिल्ली और बाहरी साहित्यकारों का उर्दू की प्रामाणिक सूची से बाहर रहना और अठारहवीं सदी की दिल्ली में नई साहित्यिक संस्कृति और काव्यशास्त्र का उदय।
दिल्ली में भाषा की शुद्धता की मुहिम और अन्योक्ति (ईहाम) के आन्दोलनों की वास्तविकता क्या है, उस्तादी/शागिर्दी का इदारा दिल्ली के अलावा कहीं और क्यों न वजूद में आया? इन प्रश्नों के अलावा ‘दिल्ली स्कूल’ और ‘लखनऊ स्कूल’ पर भी इसमें विचार किया गया है। इसका संक्षिप्त रूप शेलडन पॉलक की सम्पादित पुस्तक में प्रकाशित हो चुका है। हमें उम्मीद है कि हिन्दी के पाठकों को यह पुस्तक बेहद उपयोगी और सूचनापरक लगेगी। Urdu bhasha ki utpatti dilli ke aaspas hui, lekin aarambh mein ismen sahitya ki paidavar gujrat aur dakan mein hui. Aisa kyon hua, is par is pustak mein prkash dala gaya hai. Phir gujrat aur dakan mein saiddhantik aalochna aur kavyshastr ke uday tatha is silasile mein amir khusro aur sanskrit ki kendriy bhumika ko bhi ismen rekhankit kiya gaya hai. Iske alava is pustak mein jin vishyon ki janch-padtal ki gai hai, ve hain : dilli ka sahityik pariprekshya par der se prkat hona, dilli ke sahityik samrajyvadi svbhav ke karan gair dilli aur bahri sahitykaron ka urdu ki pramanik suchi se bahar rahna aur atharahvin sadi ki dilli mein nai sahityik sanskriti aur kavyshastr ka uday. Dilli mein bhasha ki shuddhta ki muhim aur anyokti (iiham) ke aandolnon ki vastavikta kya hai, ustadi/shagirdi ka idara dilli ke alava kahin aur kyon na vajud mein aaya? in prashnon ke alava ‘dilli skul’ aur ‘lakhanuu skul’ par bhi ismen vichar kiya gaya hai. Iska sankshipt rup sheldan paulak ki sampadit pustak mein prkashit ho chuka hai. Hamein ummid hai ki hindi ke pathkon ko ye pustak behad upyogi aur suchnaprak lagegi.