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Teen Nigahon Ki Ek Tasvir

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‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ जैसे कालजयी उपन्यासों की रचयिता मन्नू भंडारी की कहानियाँ अपने मन्तव्य की स्पष्टता, साफ़गोई और भाषागत सहजता के लिए ख़ास तौर पर उल्लेखनीय रही हैं। उनकी कहानियों में जीवन की बड़ी दिखनेवाली जटिल और गझिन समस्याओं की गहराई में जाकर, उनके तमाम सूत्रों को समेटते हुए,... Read More

Description

‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ जैसे कालजयी उपन्यासों की रचयिता मन्नू भंडारी की कहानियाँ अपने मन्तव्य की स्पष्टता, साफ़गोई और भाषागत सहजता के लिए ख़ास तौर पर उल्लेखनीय रही हैं। उनकी कहानियों में जीवन की बड़ी दिखनेवाली जटिल और गझिन समस्याओं की गहराई में जाकर, उनके तमाम सूत्रों को समेटते हुए, एक सरल, सुग्राह्य और पठनीय रचना को आकार दिया जाता है।
इस संग्रह में शीर्षक-कहानी के अलावा शामिल ‘अकेली’, ‘अनथाही गहराइयाँ’, ‘खोटे सिक्के’, ‘हार’ और ‘चश्मे’ आदि सभी कहानियाँ जीवन के विभिन्न सन्दर्भों को एक ख़ास रचनात्मक आलोचना-दृष्टि से देखते हुए पाठक को सोचने और अपने वातावरण को एक नई, ताज़ा निगाह से देखने को प्रेरित करती हैं। ‘apka banti’ aur ‘mahabhoj’ jaise kalajyi upanyason ki rachayita mannu bhandari ki kahaniyan apne mantavya ki spashtta, safgoi aur bhashagat sahajta ke liye khas taur par ullekhniy rahi hain. Unki kahaniyon mein jivan ki badi dikhnevali jatil aur gajhin samasyaon ki gahrai mein jakar, unke tamam sutron ko samette hue, ek saral, sugrahya aur pathniy rachna ko aakar diya jata hai. Is sangrah mein shirshak-kahani ke alava shamil ‘akeli’, ‘anthahi gahraiyan’, ‘khote sikke’, ‘har’ aur ‘chashme’ aadi sabhi kahaniyan jivan ke vibhinn sandarbhon ko ek khas rachnatmak aalochna-drishti se dekhte hue pathak ko sochne aur apne vatavran ko ek nai, taza nigah se dekhne ko prerit karti hain.