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Surangama

Rs. 199

“छोट्टो घर खानी मौने की पौड़े सुरंगमा? मौने की पौड़े, मौने की पौड़े?...” एक प्राणों से प्रिय व्यक्ति तीन-चार मधुर पंक्तियों से सुरंगमा के जीवन को संझा के वेग से हिलाकर रख देता है। बार-बार। शराबी, उन्मादी पति से छूटभागी लक्ष्मी को जीवनदाता मिला अँधेरे भरे रेलवे स्टेशन में। रॉबर्ट... Read More

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Description

“छोट्टो घर खानी
मौने की पौड़े सुरंगमा?
मौने की पौड़े, मौने की पौड़े?...”
एक प्राणों से प्रिय व्यक्ति तीन-चार मधुर पंक्तियों से सुरंगमा के जीवन को संझा के वेग से हिलाकर रख देता है। बार-बार।
शराबी, उन्मादी पति से छूटभागी लक्ष्मी को जीवनदाता मिला अँधेरे भरे रेलवे स्टेशन में। रॉबर्ट और वैरोनिका के स्नेहसिक्त स्पर्श में पनपने लगी थी उसकी नवजात बेटी सुरंगमा, लेकिन तभी विधि के विधान ने दुर्भाग्य का भूकम्पी झटका दिया और उस मलबे से निकली सरल निर्दोष पाँच साल की सुरंगमा कुछ ही महीनों में संसारी पुरखिन बन गई थी, फिर शिक्षिका सुरंगमा के जीवन में अंधड़ की तरह घुसता है, एक राजनेता और सुरंगमा उसकी प्रतिरक्षिता बन बैठती है।
क्या वह इस मोहपाश को तोड़कर इस दोहरे जीवन से छूट पाएगी?
मौने की पौड़े सुरंगमा?
एक एकाकी युवती की आन्तरिक और बाहरी संघर्षों की मार्मिक कथा। “chhotto ghar khaniMaune ki paude surangma?
Maune ki paude, maune ki paude?. . . ”
Ek pranon se priy vyakti tin-char madhur panktiyon se surangma ke jivan ko sanjha ke veg se hilakar rakh deta hai. Bar-bar.
Sharabi, unmadi pati se chhutbhagi lakshmi ko jivandata mila andhere bhare relve steshan mein. Raubart aur vaironika ke snehsikt sparsh mein panapne lagi thi uski navjat beti surangma, lekin tabhi vidhi ke vidhan ne durbhagya ka bhukampi jhatka diya aur us malbe se nikli saral nirdosh panch saal ki surangma kuchh hi mahinon mein sansari purkhin ban gai thi, phir shikshika surangma ke jivan mein andhad ki tarah ghusta hai, ek rajneta aur surangma uski pratirakshita ban baithti hai.
Kya vah is mohpash ko todkar is dohre jivan se chhut payegi?
Maune ki paude surangma?
Ek ekaki yuvti ki aantrik aur bahri sangharshon ki marmik katha.