BackBack

Soone Pinjre Ki Chahchahahat

Padmashri (Dr.) Ravindra Rajhans

Rs. 175.00

हिन्दी के प्रख्यात कवि पद्मश्री (डॉ.) रवीन्द्र राजहंस जी का यह नवीनतम कविता-संग्रह न केवल हिन्दी काव्य-परम्परा बल्कि सम्पूर्ण भारतीय काव्य-धारा का अनूठा विस्तार तथा समृद्धि है। सम्भवतः पहली बार वृद्धों के जीवन को आलम्बन बनाकर एक स्वतः सम्पूर्ण कविता-पुस्तक प्रस्तुत की गयी है।यह उन लोगों की कविता है जो... Read More

BlackBlack
Description
हिन्दी के प्रख्यात कवि पद्मश्री (डॉ.) रवीन्द्र राजहंस जी का यह नवीनतम कविता-संग्रह न केवल हिन्दी काव्य-परम्परा बल्कि सम्पूर्ण भारतीय काव्य-धारा का अनूठा विस्तार तथा समृद्धि है। सम्भवतः पहली बार वृद्धों के जीवन को आलम्बन बनाकर एक स्वतः सम्पूर्ण कविता-पुस्तक प्रस्तुत की गयी है।यह उन लोगों की कविता है जो ‘अपना घर रहते हो चुके हैं बेघर’, जिनका जीवन एक ढकढोल स्वेटर के समान है। जिन्हें भारतीय परम्परा और उज्ज्वलता का अभिमान है, वे इन कविताओं को पढ़ें और देखें कि कैसे श्रवण कुमार के माता-पिता कटे खेत के डरावने बिजूरने की तरह जीने को अभिशप्त हैं। कवि ने बेहद आत्मीयता, अन्तरंगताओं व पंख-स्पर्श से इन दुखियारों के जीवन का अंकन किया है। लेकिन वे यह कहना नहीं भूलते कि इस खारे मन में भी प्रेम का मीठा ज्वार है। इस सूने पिंजडे़ में भी चहचहाचट और उड़ गये विहगों की ऊष्मा है। कवि के ही शब्दों में कहें तो यह वृद्धजन के भाव-मनोदशा के उठते-गिरते स्पन्दनों का इलेक्ट्रोकर्डियोग्राम है। इन कविताओं को पढ़ते हुए आपको रुँधे हुए कंठ का धम्मक होगा और झनझना देने वालों रुदन का आभास।-अरुण कमल