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Sameeksha Kee Kasouti Par

Prof. Sher Singh Bisht

Rs. 595.00

‘समीक्षा की कसौटी पर’ पुस्तक में समीक्षा के परम्परित प्रतिमानों पर नये सिरे से विचार किया गया है। समीक्षा के मानकों के परम्परित स्वरूप, साहित्य के बदलते सन्दर्भों में उनकी उपादेयता तथा साहित्यिक मूल्यबोध आदि पर विचार करते हुए आधुनिक हिन्दी साहित्य के समग्र मूल्यांकन में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित... Read More

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Vendor: Vani Prakashan Categories: Vani Prakashan Tags: Criticism
Description
‘समीक्षा की कसौटी पर’ पुस्तक में समीक्षा के परम्परित प्रतिमानों पर नये सिरे से विचार किया गया है। समीक्षा के मानकों के परम्परित स्वरूप, साहित्य के बदलते सन्दर्भों में उनकी उपादेयता तथा साहित्यिक मूल्यबोध आदि पर विचार करते हुए आधुनिक हिन्दी साहित्य के समग्र मूल्यांकन में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया है। लेखक के अनुसार समीक्षा की एक सुस्पष्ट दृष्टि होनी चाहिए। साहित्य के मूल्य आरोपित न होकर रचना के भीतर से ही युगीन सन्दर्भों में कृति के वैशिष्ट्य को उद्घाटित करने वाले होने चाहिए। आलोचना के मानदंडों पर मौलिक चिन्तन दृष्टि से यह पुस्तक नये आयाम प्रस्तुत करती है।