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Salaam

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‘दलित लेखन दलित ही कर सकता है’ को पारम्परिक सोच के ही नहीं, प्रगतिशील कहे जानेवाले आलोचकों ने भी संकीर्णता से लिया है। दलित-विमर्श साहित्य में व्याप्त छद्म को उघाड़ रहा है। साहित्य में जो भी अनुभव आते हैं वे सार्वभौमिक और शाश्वत नहीं होते। इन सन्दर्भों में ओमप्रकाश वाल्मीकि... Read More

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Description

‘दलित लेखन दलित ही कर सकता है’ को पारम्परिक सोच के ही नहीं, प्रगतिशील कहे जानेवाले आलोचकों ने भी संकीर्णता से लिया है। दलित-विमर्श साहित्य में व्याप्त छद्म को उघाड़ रहा है। साहित्य में जो भी अनुभव आते हैं वे सार्वभौमिक और शाश्वत नहीं होते।
इन सन्दर्भों में ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियाँ दलित जीवन की संवेदनशीलता और अनुभवों की कहानियाँ हैं, जो एक ऐसे यथार्थ से साक्षात्कार कराती हैं, जहाँ हज़ारों साल की पीड़ा अँधेरे कोनों में दुबकी पड़ी है।
वाल्मीकि के इस संग्रह की कहानियाँ दलितों के जीवन-संघर्ष और उनकी बेचैनी के जीवन्त दस्तावेज़ हैं, दलित जीवन की व्यथा, छटपटाहट, सरोकार इन कहानियों में साफ़-साफ़ दिखाई पड़ते हैं।
ओमप्रकाश वाल्मीकि ने जहाँ साहित्य में वर्चस्व की सत्ता को चुनौती दी है, वहीं दबे-कुचले, शोषित-पीड़ित जन-समूह को मुखरता देकर उनके इर्द-गिर्द फैली विसंगतियों पर भी चोट की है। जो दलित विमर्श को सार्थक और गुणात्मक बनाती है।
समकालीन हिन्दी कहानी में दलित-चेतना की दस्तक देनेवाले कथाकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की ये कहानियाँ अपने आप में विशिष्ट हैं। इन कहानियों में वस्तु जगत का आनन्द नहीं, दारुण दुःख भोगते मनुष्यों की बेचैनी है। ‘dalit lekhan dalit hi kar sakta hai’ ko paramprik soch ke hi nahin, pragatishil kahe janevale aalochkon ne bhi sankirnta se liya hai. Dalit-vimarsh sahitya mein vyapt chhadm ko ughad raha hai. Sahitya mein jo bhi anubhav aate hain ve sarvbhaumik aur shashvat nahin hote. In sandarbhon mein omaprkash valmiki ki kahaniyan dalit jivan ki sanvedanshilta aur anubhvon ki kahaniyan hain, jo ek aise yatharth se sakshatkar karati hain, jahan hazaron saal ki pida andhere konon mein dubki padi hai.
Valmiki ke is sangrah ki kahaniyan daliton ke jivan-sangharsh aur unki bechaini ke jivant dastavez hain, dalit jivan ki vytha, chhataptahat, sarokar in kahaniyon mein saf-saf dikhai padte hain.
Omaprkash valmiki ne jahan sahitya mein varchasv ki satta ko chunauti di hai, vahin dabe-kuchle, shoshit-pidit jan-samuh ko mukharta dekar unke ird-gird phaili visangatiyon par bhi chot ki hai. Jo dalit vimarsh ko sarthak aur gunatmak banati hai.
Samkalin hindi kahani mein dalit-chetna ki dastak denevale kathakar omaprkash valmiki ki ye kahaniyan apne aap mein vishisht hain. In kahaniyon mein vastu jagat ka aanand nahin, darun duःkha bhogte manushyon ki bechaini hai.