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Rahat Indori

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Vani Prakashan

आग के फूलने​-​फलने का हुनर जानते हैं ना बुझा हमको के जलने का हुनर जानते हैं हर नये रंग में ढलने का हुनर जानते हैं, लोग मौसम में बदलने का हुनर जानते हैं इन्दौर की शायरी एक खूबसूरत कानन है, जहाँ मिठास की नदी लहराकर चलती है। विचारों का, संकल्पों... Read More

Description

आग के फूलने​-​फलने का हुनर जानते हैं ना बुझा हमको के जलने का हुनर जानते हैं हर नये रंग में ढलने का हुनर जानते हैं, लोग मौसम में बदलने का हुनर जानते हैं इन्दौर की शायरी एक खूबसूरत कानन है, जहाँ मिठास की नदी लहराकर चलती है। विचारों का, संकल्पों का पहाड़ है जो हर अदा से टकराने का हुनर रखता है। फूलों की नाजुकता है जो हर दिल को लुभाने का हुनर रखती है और खाइयों की सी गहराई है जो हर दिल को अपने में छुपाने का हुनर रखती है। वे हर रंग की शायरी करते हैं जिसमें प्यार का, नफरत का, गुस्से का, मेल-मिलाप के रंग बिखरे पड़े है। मेरी आँखों में कैद थी बारिश तुम ना आये तो हो गई बारिश आसमानों में ठहर गया सूरज नदियों में ठहर गई बारिश राहत अपनी शायरी में दो तरह से मिलते हैं​ - ​एक दर्शन में और एक प्रदर्शन में। जब आप उन्हें हल्के से पढ़ते हैं तो केवल आनन्द आता है, लेकिन जब आप राहत के दर्शन में, विचारों में डूबकर पढ़ते हैं तो एक दर्शन का अहसास हो जाता है। और जब आप दिल से पढ़ते हैं तो वह आपके दिलो-दिमाग पर हावी हो ​​जाएँगे और शायरी की मिठास में इतने खो जाएँगे कि बरबस ही शायरी आपके​ ​​होंठों पर कब्जा कर लेगी और आप उसके स्वप्निल संसार में गोते लगाए बिना नहीं रह पाएँगे। तेरी आँखों की हद से बढ़कर हूँ, दश्त मैं आग का समन्दर हूँ। कोई तो मेरी बात समझेगा, एक कतरा हूँ और समन्दर हूँ। aag ke phulne​ ​phalne ka hunar jante hain na bujha hamko ke jalne ka hunar jante hain har naye rang mein Dhalne ka hunar jante hain, log mausam mein badalne ka hunar jante hain indaur ki shayri ek khubsurat kanan hai, jahan mithas ki nadi lahrakar chalti hai. vicharon ka, sankalpon ka pahaD hai jo har ada se takrane ka hunar rakhta hai. phulon ki najukta hai jo har dil ko lubhane ka hunar rakhti hai aur khaiyon ki si gahrai hai jo har dil ko apne mein chhupane ka hunar rakhti hai. ve har rang ki shayri karte hain jismen pyaar ka, naphrat ka, gusse ka, mel milap ke rang bikhre paDe hai. meri ankhon mein kaid thi barish tum na aaye to ho gai barish asmanon mein thahar gaya suraj nadiyon mein thahar gai barish rahat apni shayri mein do tarah se milte hain​ ​ek darshan mein aur ek prdarshan mein. jab aap unhen halke se paDhte hain to keval anand aata hai, lekin jab aap rahat ke darshan mein, vicharon mein Dubkar paDhte hain to ek darshan ka ahsas ho jata hai. aur jab aap dil se paDhte hain to vah aapke dilo dimag par havi ho ​​jayenge aur shayri ki mithas mein itne kho jayenge ki barbas hi shayri apke​ ​​honthon par kabja kar legi aur aap uske svapnil sansar mein gote lagaye bina nahin rah payenge. teri ankhon ki had se baDhkar hoon, dasht main aag ka samandar hoon. koi to meri baat samjhega, ek katra hoon aur samandar hoon.