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Rusi Sanskriti : Udbhav Aur Vinash

Kamlesh

Rs. 795 Rs. 708

‘‘कवि कमलेश हमारे समय के सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति थे, हालाँकि उन्होंने कभी विद्वता का कोई दावा नहीं किया। उनकी रुचि साहित्य के अलावा संस्कृति और विचार के अनेक अनुशासनों जैसे—दर्शन, मनोविज्ञान, नृतत्त्व आदि में थी। महान् रूसी कवियों और उनके माध्यम से रूसी संस्कृति की उद्भव-गाथा और उसके विनाश की... Read More

Description

‘‘कवि कमलेश हमारे समय के सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति थे, हालाँकि उन्होंने कभी विद्वता का कोई दावा नहीं किया। उनकी रुचि साहित्य के अलावा संस्कृति और विचार के अनेक अनुशासनों जैसे—दर्शन, मनोविज्ञान, नृतत्त्व आदि में थी। महान् रूसी कवियों और उनके माध्यम से रूसी संस्कृति की उद्भव-गाथा और उसके विनाश की शोक-कथा प्रस्तुत करनेवाली यह अनूठी पुस्तक है। इसमें कवियों का सिर्फ़ वैचारिक विश्लेषण भर नहीं है—कविताओं का हिन्दी अनुवाद भी है। किसी विदेशी भाषा के इतने सारे महान् कवियों और उनके माध्यम से किसी देश की संस्कृति के अध्ययन का ऐसा कोई दूसरा उदाहरण हिन्दी में तो क्या शायद किसी अन्य भारतीय भाषा में भी न होगा। इस अद्वितीय पुस्तक को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
—अशोक वाजपेयी ‘‘kavi kamlesh hamare samay ke sabse padhe-likhe vyakti the, halanki unhonne kabhi vidvta ka koi dava nahin kiya. Unki ruchi sahitya ke alava sanskriti aur vichar ke anek anushasnon jaise—darshan, manovigyan, nritattv aadi mein thi. Mahan rusi kaviyon aur unke madhyam se rusi sanskriti ki udbhav-gatha aur uske vinash ki shok-katha prastut karnevali ye anuthi pustak hai. Ismen kaviyon ka sirf vaicharik vishleshan bhar nahin hai—kavitaon ka hindi anuvad bhi hai. Kisi videshi bhasha ke itne sare mahan kaviyon aur unke madhyam se kisi desh ki sanskriti ke adhyyan ka aisa koi dusra udahran hindi mein to kya shayad kisi anya bhartiy bhasha mein bhi na hoga. Is advitiy pustak ko raza pustak mala ke antargat hum saharsh prastut kar rahe hain. —ashok vajpeyi