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Rocket Ki Kahani

Gunakar Muley

Rs. 250 Rs. 223

आतिशबाज़ी में या त्योहारों के अवसरों पर जिन ‘राकेटों’ को उड़ाया जाता है, उनका आविष्कार सदियों पहले हुआ था। मनोरंजन करनेवाले इन छोटे राकेटों में और आदमी को चन्द्रमा तक पहुँचानेवाले आज के भीमकाय राकेटों में सिद्धान्तत: कोई अन्तर नहीं है। आतिशबाज़ी के ‘राकेट’ भी निर्वात में यात्रा कर सकते... Read More

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Description

आतिशबाज़ी में या त्योहारों के अवसरों पर जिन ‘राकेटों’ को उड़ाया जाता है, उनका आविष्कार सदियों पहले हुआ था। मनोरंजन करनेवाले इन छोटे राकेटों में और आदमी को चन्द्रमा तक पहुँचानेवाले आज के भीमकाय राकेटों में सिद्धान्तत: कोई अन्तर नहीं है। आतिशबाज़ी के ‘राकेट’ भी निर्वात में यात्रा कर सकते हैं लेकिन वह इतना शक्तिशाली नहीं होते, इसलिए कुछ मीटर ऊपर जाकर नीचे आ गिरते हैं, परन्तु अब ऐसे राकेट बन चुके हैं जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को लाँघते हुए बाह्य अन्तरिक्ष तक पहुँच जाते हैं। यही एक राकेट-यान है जो अन्तरिक्ष में यात्रा कर सकता है। इसी मानव-निर्मित यान ने अन्तरिक्ष-यात्रा के युग का उद्घाटन किया है।
राकेट-यान ने धरती के मानव को चन्द्रमा तक पहुँचाया है। निकट भविष्य में यह यान आदमी को सौर-मंडल के सभी ग्रहों तक पहुँचा देगा, और आगे यही यान आदमी को दूसरे तारों के ग्रहों तक या आकाशगंगाओं की दूरस्थ सीमाओं तक भी लेकर जा सकता है। श्री मुळे ने पी.एस.एल.वी. राकेट-यान शृंखला तक के विकास, निर्माण और उन्हें अन्तरिक्ष में छोड़े जाने की कहानी को इस पुस्तक में बड़ी ही रोचक और सरल भाषा में लिखा है और राकेट विज्ञान के तमाम सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक पहलुओं से पाठकों को अवगत कराया है। Aatishbazi mein ya tyoharon ke avasron par jin ‘raketon’ ko udaya jata hai, unka aavishkar sadiyon pahle hua tha. Manoranjan karnevale in chhote raketon mein aur aadmi ko chandrma tak pahunchanevale aaj ke bhimkay raketon mein siddhantat: koi antar nahin hai. Aatishbazi ke ‘raket’ bhi nirvat mein yatra kar sakte hain lekin vah itna shaktishali nahin hote, isaliye kuchh mitar uupar jakar niche aa girte hain, parantu ab aise raket ban chuke hain jo prithvi ke gurutvakarshan kshetr ko langhate hue bahya antriksh tak pahunch jate hain. Yahi ek raket-yan hai jo antriksh mein yatra kar sakta hai. Isi manav-nirmit yaan ne antriksh-yatra ke yug ka udghatan kiya hai. Raket-yan ne dharti ke manav ko chandrma tak pahunchaya hai. Nikat bhavishya mein ye yaan aadmi ko saur-mandal ke sabhi grhon tak pahuncha dega, aur aage yahi yaan aadmi ko dusre taron ke grhon tak ya aakashgangaon ki durasth simaon tak bhi lekar ja sakta hai. Shri muळe ne pi. Es. El. Vi. Raket-yan shrinkhla tak ke vikas, nirman aur unhen antriksh mein chhode jane ki kahani ko is pustak mein badi hi rochak aur saral bhasha mein likha hai aur raket vigyan ke tamam saiddhantik tatha vyavharik pahaluon se pathkon ko avgat karaya hai.