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Reti Ke Phool : Dinkar Granthmala

Ramdhari Singh 'Dinkar'

Rs. 395 Rs. 352

Lokbharti Prakashan

‘रेती के फूल' युवा पीढ़ी के लिए एक युगदृष्टा साहित्यकार का उद्बोधन है। इसमें शामिल प्रत्येक निबन्ध ओजस्वी और प्रेरणा का पुंज है। 'हिम्मत और ज़िन्दगी', 'ईर्ष्या, तू न गई मन से', 'कर्म और वाणी', 'खड्ग और वीणा', 'कला, धर्म और विज्ञान' और 'संस्कृति है क्या?' जैसे शाश्वत विषयों के... Read More

Description

‘रेती के फूल' युवा पीढ़ी के लिए एक युगदृष्टा साहित्यकार का उद्बोधन है। इसमें शामिल प्रत्येक निबन्ध ओजस्वी और प्रेरणा का पुंज है।
'हिम्मत और ज़िन्दगी', 'ईर्ष्या, तू न गई मन से', 'कर्म और वाणी', 'खड्ग और वीणा', 'कला, धर्म और विज्ञान' और 'संस्कृति है क्या?' जैसे शाश्वत विषयों के अतिरिक्त 'भविष्य के लिए लिखने की बात', 'राष्ट्रीयता और अन्तरराष्ट्रीयता', 'हिन्दी कविता में एकता का प्रवाह', 'नेता नहीं, नागरिक चाहिए' जैसे ज्वलन्त मुद्दों पर समर्थ कवि का मौलिक चिन्तन है जो आज भी उतना ही सार्थक है, जितना साठ वर्षों पूर्व था।
वस्तुतः 'रेती के फूल' ऐसे निबन्धों का संग्रह है जिसमें कलाकारिता तो है ही, जो विचारोत्तेजक भी हैं। ‘reti ke phul yuva pidhi ke liye ek yugdrishta sahitykar ka udbodhan hai. Ismen shamil pratyek nibandh ojasvi aur prerna ka punj hai. Himmat aur zindagi, iirshya, tu na gai man se, karm aur vani, khadg aur vina, kala, dharm aur vigyan aur sanskriti hai kya? jaise shashvat vishyon ke atirikt bhavishya ke liye likhne ki bat, rashtriyta aur antarrashtriyta, hindi kavita mein ekta ka prvah, neta nahin, nagrik chahiye jaise jvlant muddon par samarth kavi ka maulik chintan hai jo aaj bhi utna hi sarthak hai, jitna saath varshon purv tha.
Vastutः reti ke phul aise nibandhon ka sangrah hai jismen kalakarita to hai hi, jo vicharottejak bhi hain.