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Rashomon And Other Short Stories

Rs. 75

प्रस्तुत संकलन में र् यूनोसुके आकुतागावा की पाँच प्रसिद्ध कहानियाँ शामिल की गई हैं। ‘राशोमोन’ जहाँ सामाजिक विघटन की प्रक्रिया को उजागर करता है वहाँ ‘सन्तरे’, ‘मकड़ी के जाल का एक तार’, और ‘शिरो’ मानवीय मूल्यों की पुन: स्थापना की चेष्टा। ‘मकड़ी के जाल का एक तार’ एवं ‘तोशिशुन’ बहुत... Read More

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Description

प्रस्तुत संकलन में र् यूनोसुके आकुतागावा की पाँच प्रसिद्ध कहानियाँ शामिल की गई हैं। ‘राशोमोन’ जहाँ सामाजिक विघटन की प्रक्रिया को उजागर करता है वहाँ ‘सन्तरे’, ‘मकड़ी के जाल का एक तार’, और ‘शिरो’ मानवीय मूल्यों की पुन: स्थापना की चेष्टा। ‘मकड़ी के जाल का एक तार’ एवं ‘तोशिशुन’ बहुत कुछ भारतीय दन्तकथाओं से प्रेरित हैं। साथ ही इन कहानियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह आवश्यक टिप्पणियाँ भी दी गई हैं।
अनुवादिका द्वारा इन कहानियों में अन्तर्निहित भावनाओं और वैचारिक विशिष्टताओं के भरपूर सम्प्रेषण को ध्यान में रखते हुए कथाकार की भाषा शैली को बरकरार रखने की कोशिश की गई है। सम्भवत: मूल जापानी से हिन्दी में अनूदित कहानियों की यह पहली कृति है जो आकुतागावा के रचना-संसार से पाठकों का परिचय कराएगी। Prastut sanklan mein yunosuke aakutagava ki panch prsiddh kahaniyan shamil ki gai hain. ‘rashomon’ jahan samajik vightan ki prakriya ko ujagar karta hai vahan ‘santre’, ‘makdi ke jaal ka ek tar’, aur ‘shiro’ manviy mulyon ki pun: sthapna ki cheshta. ‘makdi ke jaal ka ek tar’ evan ‘toshishun’ bahut kuchh bhartiy dantakthaon se prerit hain. Saath hi in kahaniyon ki aitihasik prishthbhumi aur sanskritik visheshtaon ko dhyan mein rakhte hue jagah-jagah aavashyak tippaniyan bhi di gai hain. Anuvadika dvara in kahaniyon mein antarnihit bhavnaon aur vaicharik vishishttaon ke bharpur sampreshan ko dhyan mein rakhte hue kathakar ki bhasha shaili ko barakrar rakhne ki koshish ki gai hai. Sambhvat: mul japani se hindi mein anudit kahaniyon ki ye pahli kriti hai jo aakutagava ke rachna-sansar se pathkon ka parichay karayegi.