Look Inside
Rashid Jahan Ki Kahaniyan
Rashid Jahan Ki Kahaniyan

Rashid Jahan Ki Kahaniyan

Regular price ₹ 200
Sale price ₹ 200 Regular price ₹ 200
Unit price
Save 0%
Tax included.

Earn Popcoins

Size guide

Pay On Delivery Available

Rekhta Certified

7 Day Easy Return Policy

Rashid Jahan Ki Kahaniyan

Rashid Jahan Ki Kahaniyan

Cash-On-Delivery

Cash On Delivery available

Plus (F-Assured)

7-Days-Replacement

7 Day Replacement

Product description
Shipping & Return
Offers & Coupons
Read Sample
Product description

....और यदि एकांकी ‘पर्दे के पीछे' में वह पर्दे के पीछे के उस दर्दनाक मंजर का बयान कर पाईं जहाँ मुस्लिम औरतों के आँसू हैं, घुटन है, वंचनाएँ व बीमारियाँ हैं, सौतनों का त्रास तथा देह का अमानवीय शोषण है, तो वह अभिव्यक्ति की उसी साहसिकता की ओर बढ़ रही थीं जिसने आने वाले समय में स्त्री विमर्श के ठोस आधार निर्मित किए। यों तो स्त्री सरोकारों से जुड़कर विकसित हुए उर्दू कथा साहित्य की समृद्ध परम्परा रशीदजहाँ को विरासत में मिली थी। इसे उन्होंने आगे अवश्य बढ़ाया परन्तु अपने लिए अलग राह भी निकाली, जो यथार्थ के ज़्यादा निकट थी और जिसका फलक भी ज्यादा विशाल था। वह यूरोपीय साहित्य के निकट सम्पर्क में थीं। कारणवश उनकी कहानियाँ गहरे आधुनिकताबोध से सम्पन्न नज़र आती हैं। पितृसत्ता की विसंगतियों को जानते हुए उन्होंने सामाजिक संरचना की उन विद्रूपताओं को भी समझा था, उन ऐतिहासिक कारणों का ज्ञान भी संचित किया था, जो स्त्री की त्रासद अवस्था का मुख्य कारक बने धर्म, उसके शास्त्र सारी दुनिया की स्त्रियों के लिए, जकड़बन्दी का बड़ा कारण बने हुए हैं। स्वयं स्त्री की देह जिस पर उसका अधिकार प्रायः बहुत कम होता है, उसका यन्त्रणा शिविर और कारागार साबित होता है। यही कारण है कि उनकी कहानियों में मुस्लिम मध्यमवर्ग की जीवनस्थितियों और स्त्रियों को केन्द्रीयता प्राप्त होने तथा स्त्री यथार्थ के दैहिक प्रश्नों की प्रबलता के बावजूद वो इस यथार्थ के किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं हैं। आसिफ़जहाँ की बहू, छिद्दा की माँ, बेज़बान, सास और बहू, इफ्तारी, इस्तख़ारा तथा वह उनकी सर्वाधिक चर्चित कहानियाँ हैं। इनमें 'वह' को छोड़कर सभी स्त्री पात्र विशिष्ट सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस संस्कृति और इन स्त्रियों से रशीद जहाँ का करीबी परिचय है। सामन्तवाद के दमनकारी वैभव से आक्रान्त यह संस्कृति जिसमें संरक्षणवाद का एक कोना भी है, कई बार स्त्री का यातना शिविर साबित हुई है। जैसे कि 'बेज़बान' की सिद्दी का बेगम, जो इस संस्कृति को ओढे परिवारों में वर पक्ष को शादी से पहले लड़की न दिखाने की रिवायत के कारण कुँवारी रह जाती है। रशीद जहाँ इस संस्कृति पर भरपूर व्यंग करती हैं। .... भूमिका से

Shipping & Return
  • Over 27,000 Pin Codes Served: Nationwide Delivery Across India!

  • Upon confirmation of your order, items are dispatched within 24-48 hours on business days.

  • Certain books may be delayed due to alternative publishers handling shipping.

  • Typically, orders are delivered within 5-7 days.

  • Delivery partner will contact before delivery. Ensure reachable number; not answering may lead to return.

  • Study the book description and any available samples before finalizing your order.

  • To request a replacement, reach out to customer service via phone or chat.

  • Replacement will only be provided in cases where the wrong books were sent. No replacements will be offered if you dislike the book or its language.

Note: Saturday, Sunday and Public Holidays may result in a delay in dispatching your order by 1-2 days.

Offers & Coupons

Use code FIRSTORDER to get 10% off your first order.


Use code REKHTA10 to get a discount of 10% on your next Order.


You can also Earn up to 20% Cashback with POP Coins and redeem it in your future orders.

Read Sample

Customer Reviews

Be the first to write a review
0%
(0)
0%
(0)
0%
(0)
0%
(0)
0%
(0)

Related Products

Recently Viewed Products