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Ram Prasad Bismil Ko Phansi V Mahavir Singh Ka Balidan

Rs. 195 Rs. 174

शताब्दियों की पराधीनता के बाद भारत के क्षितिज पर स्वतंत्रता का जो सूर्य चमका, वह अप्रतिम था। इस सूर्य की लालिमा में उन असंख्य देशभक्तों का लहू भी शामिल था, जिन्होंने अपना सर्वस्व क्रान्ति की बलिवेदी पर न्योछावर कर दिया। इन देशभक्तों में रामप्रसाद बिस्मिल का नाम अग्रगण्य है। संगठनकर्ता,... Read More

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Description

शताब्दियों की पराधीनता के बाद भारत के क्षितिज पर स्वतंत्रता का जो सूर्य चमका, वह अप्रतिम था। इस सूर्य की लालिमा में उन असंख्य देशभक्तों का लहू भी शामिल था, जिन्होंने अपना सर्वस्व क्रान्ति की बलिवेदी पर न्योछावर कर दिया। इन देशभक्तों में रामप्रसाद बिस्मिल का नाम अग्रगण्य है। संगठनकर्ता, शायर और क्रान्तिकारी के रूप में बिस्मिल का योगदान अतुलनीय है। ‘काकोरी केस’ में बिस्मिल को दोषी पाकर फ़िरंगियों ने उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया था। इस प्रकरण का दस्तावेज़ी विवरण प्रस्तुत पुस्तक को ख़ास बनाता है।
शहीद महावीर सिंह साहस व समर्पण की प्रतिमूर्ति थे। तत्कालीन अनेक क्रान्तिकारियों से उनके हार्दिक सम्बन्ध थे। इनका बलिदान ऐसी गाथा है, जिसे कोई भी देशभक्त नागरिक गर्व से बार-बार पढ़ना चाहेगा। पुस्तक पढ़ते समय रामप्रसाद बिस्मिल की ये पंक्तियाँ मन में गूँजती रहती हैं—‘सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है/देखना है ज़ोर कितना बाज़़ू-ए-क़ातिल में है।’ एक महत्‍त्‍वपूर्ण और संग्रहणीय पुस्तक। Shatabdiyon ki paradhinta ke baad bharat ke kshitij par svtantrta ka jo surya chamka, vah aprtim tha. Is surya ki lalima mein un asankhya deshbhakton ka lahu bhi shamil tha, jinhonne apna sarvasv kranti ki balivedi par nyochhavar kar diya. In deshbhakton mein ramaprsad bismil ka naam agrganya hai. Sangathankarta, shayar aur krantikari ke rup mein bismil ka yogdan atulniy hai. ‘kakori kes’ mein bismil ko doshi pakar firangiyon ne unhen phansi par chadha diya tha. Is prakran ka dastavezi vivran prastut pustak ko khas banata hai. Shahid mahavir sinh sahas va samarpan ki prtimurti the. Tatkalin anek krantikariyon se unke hardik sambandh the. Inka balidan aisi gatha hai, jise koi bhi deshbhakt nagrik garv se bar-bar padhna chahega. Pustak padhte samay ramaprsad bismil ki ye panktiyan man mein gunjati rahti hain—‘sarafroshi ki tamanna ab hamare dil mein hai/dekhna hai zor kitna bazu-e-qatil mein hai. ’ ek mahat‍‍vapurn aur sangrahniy pustak.