BackBack
-10%

Rajbhasha Hindi

Dr. Kailashchandra Bhatia

Rs. 395 Rs. 356

Vani Prakashan

राजभाषा' के रूप में हिन्दी का विकास मात्र भारतीय संविधान के निर्माण के साथ ही प्रारम्भ नहीं हुआ था वरन् उससे बहुत पहले विभिन्न रूपों में हो चुका था। प्रस्तुत पुस्तक में राजभाषा के इतिहास और उसके संवैधानिक विकास के साथ ही उसकी वर्तमान स्थिति को स्पष्ट किया गया है।... Read More

Description
राजभाषा' के रूप में हिन्दी का विकास मात्र भारतीय संविधान के निर्माण के साथ ही प्रारम्भ नहीं हुआ था वरन् उससे बहुत पहले विभिन्न रूपों में हो चुका था। प्रस्तुत पुस्तक में राजभाषा के इतिहास और उसके संवैधानिक विकास के साथ ही उसकी वर्तमान स्थिति को स्पष्ट किया गया है। भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा इस दिशा में जो विभिन्न प्रयास किये गये हैं, उनका संक्षिप्त विवरण भी इस पुस्तक में है। राजभाषा हिन्दी राजभाषा के रूप में हिन्दी में रुचि रखने वाले जिज्ञासुओं तथा विद्वानों के लिए एक उपयोगी पुस्तक। rajbhasha ke roop mein hindi ka vikas maatr bhartiy sanvidhan ke nirman ke saath hi prarambh nahin hua tha varan usse bahut pahle vibhinn rupon mein ho chuka tha. prastut pustak mein rajbhasha ke itihas aur uske sanvaidhanik vikas ke saath hi uski vartman sthiti ko spasht kiya gaya hai. bharat sarkar ke rajbhasha vibhag dvara is disha mein jo vibhinn pryaas kiye gaye hain, unka sankshipt vivran bhi is pustak mein hai. rajbhasha hindi rajbhasha ke roop mein hindi mein ruchi rakhne vale jigyasuon tatha vidvanon ke liye ek upyogi pustak.