RAAG RAJASTHAN | राग राजस्थान (लोकवाद्यों की ध्वनि-परम्परा)
| Item Weight | 250gm |
| ISBN | 978-93-48290-40-3 |
| Author | Dr Anshu Verma, Dr Poonam Atwal |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vera Prakashan |
| Pages | 192 |
| Dimensions | 5.25X8X0.5 Inch |
| Publishing year | 2026 |
| Edition | First |
RAAG RAJASTHAN | राग राजस्थान (लोकवाद्यों की ध्वनि-परम्परा)
राजस्थान को भले ही शुष्क प्रदेश कहा जाता हो, लेकिन संगीत, कला, भाषा और साहित्य के क्षेत्र में यह अत्यंत समृद्ध प्रदेश है।
जुझार के इस प्रदेश में बाहर से जहाँ जीवन अत्यंत कठिन है, वहीं लुप्त सरस्वती की धारा की तरह संगीत की राग-रागिनियों और लोक संगीत ने इसे भीतर से सरस बनाए रखा है।
मनुष्य के भीतर का राग कभी भी कुन्द नहीं होना चाहिए और न ही सूखना चाहिए। जीवन बाहर से जितना कठिन और कठोर हो, उतना ही भीतर का अनहद नाद राग-भरा होना चाहिए- यही मंत्र ‘राग राजस्थान’ का लक्ष्य है।
राजस्थान जिसमें संतों-सूरमाओं के शौर्य और शान है, राजस्थान जहाँ त्याग-तप-बलिदान का राग है, राजस्थान जिसमें एक तरफ मरण भी त्योहार है तो दूसरी तरफ जीवन-रस और भक्ति-शृंगार की भी त्रिवेणी बहती है। यहाँ जीवन का सप्तस्वर और हर रंग है। यही नहीं, यहाँ बाह्य धरातल पर लोक संगीत, संस्कृति, उत्सव और पर्व हैं तो मनुष्य के भीतर के नाद भी लय और ताल के साथ नृत्य करते हैं। इसी तथ्य को इस पुस्तक के रूप में पकड़ने और समझाने का यह एक सुंदर प्रयास है। जीवन के संगीत के रूप में हमें इसे देखना चाहिए।
— गीता सामौर
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