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Qayas

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‘क़यास’ एक असाधारण उपन्यास है जहाँ रोज़मर्रा की साधारण सामग्री से गम्भीर और कलात्मक परिष्कृत कृति ने आकार लिया है। इस सामग्री से कोई भी और लेखक अतिनाटकीय बम्बइया कृति बना डालता है। ‘क़यास’ में अतिनाटकीयता है ज़रूर लेकिन उसे उपन्यासकार ने सहलाने की जगह, उसका मज़ाक बनाया है। इस... Read More

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Description

‘क़यास’ एक असाधारण उपन्यास है जहाँ रोज़मर्रा की साधारण सामग्री से गम्भीर और कलात्मक परिष्कृत कृति ने आकार लिया है। इस सामग्री से कोई भी और लेखक अतिनाटकीय बम्बइया कृति बना डालता है। ‘क़यास’ में अतिनाटकीयता है ज़रूर लेकिन उसे उपन्यासकार ने सहलाने की जगह, उसका मज़ाक बनाया है। इस उपन्यास की भाषा उचित ही ऊँचे स्तर की है, इसमें प्रयुक्त उपमाएँ और रूपक ज़रा भी कृत्रिम हुए बिना काव्यात्मक और नैसर्गिक हैं। पूरे उपन्यास में एक भी शब्द फ़िज़ूल नहीं है। मुझे यह पढ़कर सन्तोष से बहुत अधिक हासिल हुआ। लखना उर्फ़ लखन लाल का चरित्र ठीक ही अविस्मरणीय है, उपन्यास में उसे गौरवमय स्थान दिया गया है। यह उसी के एकालाप से ख़त्म होता है। Quote - हिन्दी उपन्यास मध्यवर्गीय जीवन और उसके रिश्तों के उत्सव में अपना गौरव मानता रहा है। उदयन वाजपेयी का ‘क़यास’ उन थोड़े-से उपन्यासों में है जो बिना किसी यथार्थवादी फर्नीचर के कोलाहल को मुमकिन कर देता है। इस उपन्यास में काव्यात्मक छरहरापन है। —कृष्ण बलदेव वैद ‘qayas’ ek asadharan upanyas hai jahan rozmarra ki sadharan samagri se gambhir aur kalatmak parishkrit kriti ne aakar liya hai. Is samagri se koi bhi aur lekhak atinatkiy bambaiya kriti bana dalta hai. ‘qayas’ mein atinatkiyta hai zarur lekin use upanyaskar ne sahlane ki jagah, uska mazak banaya hai. Is upanyas ki bhasha uchit hi uunche star ki hai, ismen pryukt upmayen aur rupak zara bhi kritrim hue bina kavyatmak aur naisargik hain. Pure upanyas mein ek bhi shabd fizul nahin hai. Mujhe ye padhkar santosh se bahut adhik hasil hua. Lakhna urf lakhan laal ka charitr thik hi avismarniy hai, upanyas mein use gauravmay sthan diya gaya hai. Ye usi ke ekalap se khatm hota hai. Quote - hindi upanyas madhyvargiy jivan aur uske rishton ke utsav mein apna gaurav manta raha hai. Udyan vajpeyi ka ‘qayas’ un thode-se upanyason mein hai jo bina kisi yatharthvadi pharnichar ke kolahal ko mumkin kar deta hai. Is upanyas mein kavyatmak chharahrapan hai. —krishn baldev vaid