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Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani

Rs. 499 Rs. 444

यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ। —पी. साईनाथ; पत्रकार व लेखक प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है। —अमिताव घोष; लेखक यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना... Read More

Description

यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ।
—पी. साईनाथ; पत्रकार व लेखक
प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है।
—अमिताव घोष; लेखक
यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना और समझना ज़रूरी है।
—अरुणा रॉय; समाजकर्मी
वैश्वीकरण के विशाल पुस्तक-संग्रह में यह किताब बौद्धिक साहस और ईमान का एक कीर्तिमान है जो बेहतर दुनिया के लिए रास्ता दिखाती है।
—अमित भादुड़ी; अर्थशास्त्री
आज अगर गाँधी जी ज़‍िन्दा होते और 'हिन्द स्वराज' की रचना करते, तो उन्हें लगभग उन्हीं सवालों से जूझना पड़ता जो इस किताब में हैं।
—गणेश देवी; लेखक और भाषाविद्
यह किताब दर्शाती है कि इस वैश्विक युग में हमारी तथाकथित स्वेच्छा वस्तुत: कितनी पराधीन है...आज की दुनिया से चिन्तित किसी भी इनसान के लिए यह पुस्तक अनिवार्य है।
—मल्लिका साराभाई; नृत्यांगना और संस्कृतिकर्मी
आज के वैश्विक युग की तमाम तब्दीलियों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संश्लेषण है...साथ ही इस किताब में एक वैकल्पिक दुनिया की कल्पना की गई है जिस पर गम्भीरता से सोचने और बहस करने की ज़रूरत है।
—माधव गाडगिल; पर्यावरणशास्त्री
यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और असरदार किताब है...लेखक जो व्यापक प्रमाण पेश करता है उसका हमें सामना करना होगा।
—हर्ष मंदर; समाजकर्मी Ye ek behatrin kitab hai. . . Kaksha mein main iska pryog kisi aur pustak se zyada karta hun. —pi. Sainath; patrkar va lekhak
Prchar-hamla ko chirti hui ye kitab batati hai ki aaj kya ho raha hai.
—amitav ghosh; lekhak
Ye aaj ke virodhi-dharaon ka ek mahattvpurn vrittant hai. . . Is paksh ko sunna aur samajhna zaruri hai.
—aruna rauy; samajkarmi
Vaishvikran ke vishal pustak-sangrah mein ye kitab bauddhik sahas aur iiman ka ek kirtiman hai jo behtar duniya ke liye rasta dikhati hai.
—amit bhadudi; arthshastri
Aaj agar gandhi ji za‍inda hote aur hind svraj ki rachna karte, to unhen lagbhag unhin savalon se jujhna padta jo is kitab mein hain.
—ganesh devi; lekhak aur bhashavid
Ye kitab darshati hai ki is vaishvik yug mein hamari tathakthit svechchha vastut: kitni paradhin hai. . . Aaj ki duniya se chintit kisi bhi insan ke liye ye pustak anivarya hai.
—mallika sarabhai; nrityangna aur sanskritikarmi
Aaj ke vaishvik yug ki tamam tabdiliyon ke pariprekshya mein ye pustak ek mahattvpurn sanshleshan hai. . . Saath hi is kitab mein ek vaikalpik duniya ki kalpna ki gai hai jis par gambhirta se sochne aur bahas karne ki zarurat hai.
—madhav gadgil; paryavaranshastri
Ye ek bahut hi mahattvpurn aur asardar kitab hai. . . Lekhak jo vyapak prman pesh karta hai uska hamein samna karna hoga.
—harsh mandar; samajkarmi