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Premchand Ek Vivechan

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प्रेमचन्द हिन्दी के ऐसे श्रेष्ठतम उपन्यासकार हैं, जिनके ग्रन्थों में दमन और उत्पीड़न के युग के समाज की अवस्था का यथार्थ चित्रण और प्रतिबिम्ब मिलता है। उन्होंने उन समस्याओं और मान्यताओं का स्पष्ट चित्र अंकित किया है जो मध्यवर्ग, ज़मींदार, पूँजीपति, किसान, मज़दूर, अछूत और समाज से बहिष्कृत व्यक्तियों के... Read More

Description

प्रेमचन्द हिन्दी के ऐसे श्रेष्ठतम उपन्यासकार हैं, जिनके ग्रन्थों में दमन और उत्पीड़न के युग के समाज की अवस्था का यथार्थ चित्रण और प्रतिबिम्ब मिलता है। उन्होंने उन समस्याओं और मान्यताओं का स्पष्ट चित्र अंकित किया है जो मध्यवर्ग, ज़मींदार, पूँजीपति, किसान, मज़दूर, अछूत और समाज से बहिष्कृत व्यक्तियों के जीवन को संचालित करती हैं। उन्होंने किसानों के मानसिक गठन और मध्यवर्ग के दृष्टिकोण को उस समय गम्भीर विश्वास और उत्साह के साथ वाणी दी, जिस समय इस देश के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन हो रहे थे। जिस वर्ग-संघर्ष को उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों में स्पष्टता से चित्रित किया है, उसी वर्ग-संघर्ष की दृष्टि से प्रस्तुत पुस्तक में उनकी कला का विवेचन और उनके मस्तिष्क का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है। प्रेमचन्द के समस्त उपन्यासों और कुछ प्रतिनिधि कहानियों का अध्ययन प्रस्तुत करनेवाली महत्त्वपूर्ण पुस्तक है यह। Premchand hindi ke aise shreshthtam upanyaskar hain, jinke granthon mein daman aur utpidan ke yug ke samaj ki avastha ka yatharth chitran aur pratibimb milta hai. Unhonne un samasyaon aur manytaon ka spasht chitr ankit kiya hai jo madhyvarg, zamindar, punjipati, kisan, mazdur, achhut aur samaj se bahishkrit vyaktiyon ke jivan ko sanchalit karti hain. Unhonne kisanon ke mansik gathan aur madhyvarg ke drishtikon ko us samay gambhir vishvas aur utsah ke saath vani di, jis samay is desh ke samajik aur rajnitik jivan mein krantikari parivartan ho rahe the. Jis varg-sangharsh ko unhonne apne upanyason aur kahaniyon mein spashtta se chitrit kiya hai, usi varg-sangharsh ki drishti se prastut pustak mein unki kala ka vivechan aur unke mastishk ka adhyyan karne ka pryas kiya gaya hai. Premchand ke samast upanyason aur kuchh pratinidhi kahaniyon ka adhyyan prastut karnevali mahattvpurn pustak hai ye.

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