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Pratinidhi Kahaniyan : Yashpal

Yashpal

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प्रेमचन्द की कथा-परम्परा को विकसित करनेवाले सुविख्यात कथाकार यशपाल के लिए साहित्य एक ऐसा शास्त्र था, जिससे उन्हें संस्कृति का पूरा युद्ध जितना था। और उन्होंने जीता। प्रत्येक स्तर पर वे सजग थे। विचार, तर्क, व्यंग्य, कलात्मक सौन्दर्य, मर्म-ग्राह्यता—हर स्तर पर उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया। समाज में जहाँ... Read More

Description

प्रेमचन्द की कथा-परम्परा को विकसित करनेवाले सुविख्यात कथाकार यशपाल के लिए साहित्य एक ऐसा शास्त्र था, जिससे उन्हें संस्कृति का पूरा युद्ध जितना था। और उन्होंने जीता। प्रत्येक स्तर पर वे सजग थे। विचार, तर्क, व्यंग्य, कलात्मक सौन्दर्य, मर्म-ग्राह्यता—हर स्तर पर उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया। समाज में जहाँ कहीं भी शोषण और उत्पीड़न था, जहाँ कहीं भी रूढ़ियों, परम्पराओं, नैतिकताओं, धर्म और संस्कारों की जकड़ में जीवन कसमसा रहा था, यशपाल की दृष्टि वहीं पड़ी और उन्होंने पूरी शक्ति से वहीं प्रहार किया। इसी दृष्टि को लेकर उन्होंने उस इतिहास-क्षेत्र में प्रवेश किया जहाँ के भीषण अनुभवों को भव्य और दिव्य कहा गया था। उन्होंने उस मानव-विरोधी इतिहास की धज्जियाँ उड़ा दीं। व्यंग्य उनकी रचना में तलवार की तरह रहा है और वे रहे हैं नए समाज की पुनर्रचना के लिए समर्पित एक योद्धा। मर्मभेदी दृष्टि, प्रौढ़ विचार और क्रन्तिकारी दर्शन ने उन्हें विश्व के महानतम रचनाकारों की श्रेणी में ला बिठाया है। ये कहानियाँ उनकी इसी तेजोमय यात्रा का प्रमाण जुटाती हैं। Premchand ki katha-parampra ko viksit karnevale suvikhyat kathakar yashpal ke liye sahitya ek aisa shastr tha, jisse unhen sanskriti ka pura yuddh jitna tha. Aur unhonne jita. Pratyek star par ve sajag the. Vichar, tark, vyangya, kalatmak saundarya, marm-grahyta—har star par unhonne apni pratibha ka prman diya. Samaj mein jahan kahin bhi shoshan aur utpidan tha, jahan kahin bhi rudhiyon, parampraon, naitiktaon, dharm aur sanskaron ki jakad mein jivan kasamsa raha tha, yashpal ki drishti vahin padi aur unhonne puri shakti se vahin prhar kiya. Isi drishti ko lekar unhonne us itihas-kshetr mein prvesh kiya jahan ke bhishan anubhvon ko bhavya aur divya kaha gaya tha. Unhonne us manav-virodhi itihas ki dhajjiyan uda din. Vyangya unki rachna mein talvar ki tarah raha hai aur ve rahe hain ne samaj ki punarrachna ke liye samarpit ek yoddha. Marmbhedi drishti, praudh vichar aur krantikari darshan ne unhen vishv ke mahantam rachnakaron ki shreni mein la bithaya hai. Ye kahaniyan unki isi tejomay yatra ka prman jutati hain.