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Pratinidhi Kahaniyan : Rangeya Raghav

Rangeya Raghav

Rs. 150 Rs. 134

रांगेय राघव के कहानी-लेखन का मुख्य दौर भारतीय इतिहास की दृष्टि से बहुत हलचल-भरा विरल कालखंड है, कम मौक़ों पर भारतीय जनता ने इतने स्वप्न और दुःस्वप्न एक साथ देखे थे—आशा और हताशा ऐसे अड़ोस-पड़ोस में खड़ी देखी थी। और रांगेय राघव की कहानियों की विशेषता यह है कि उस... Read More

Description

रांगेय राघव के कहानी-लेखन का मुख्य दौर भारतीय इतिहास की दृष्टि से बहुत हलचल-भरा विरल कालखंड है, कम मौक़ों पर भारतीय जनता ने इतने स्वप्न और दुःस्वप्न एक साथ देखे थे—आशा और हताशा ऐसे अड़ोस-पड़ोस में खड़ी देखी थी। और रांगेय राघव की कहानियों की विशेषता यह है कि उस पूरे समय की शायद ही कोई घटना हो, जिसकी गूँजें-अनुगूँजें उनमें न सुनी जा सकें। सच तो यह है कि रांगेय राघव ने हिन्दी-कहानी को भारतीय समाज के उन धूल-काँटों-भरे रास्तों, आवारे-लफंडरों-परजीवियों की फक्कड़ ज़िन्दगी, भारतीय गाँवों की कच्ची और कीचड़-भरी पगडंडियों की गश्त करवाई, जिनसे वह भले ही अब तक पूर्णतः अपरिचित न रही हो पर इस तरह हिली-मिली भी नहीं थी; और इन ‘दुनियाओं’ में से जीवन से लबलबाते ऐसे-ऐसे क़द्दावर चरित्र प्रकट किए, जिन्हें हम विस्मृत नहीं कर सकेंगे। ‘गदल’ को क्या कोई भूल सकता है...? Rangey raghav ke kahani-lekhan ka mukhya daur bhartiy itihas ki drishti se bahut halchal-bhara viral kalkhand hai, kam mauqon par bhartiy janta ne itne svapn aur duःsvapn ek saath dekhe the—asha aur hatasha aise ados-pados mein khadi dekhi thi. Aur rangey raghav ki kahaniyon ki visheshta ye hai ki us pure samay ki shayad hi koi ghatna ho, jiski gunjen-anugunjen unmen na suni ja saken. Sach to ye hai ki rangey raghav ne hindi-kahani ko bhartiy samaj ke un dhul-kanton-bhare raston, aavare-laphandron-parjiviyon ki phakkad zindagi, bhartiy ganvon ki kachchi aur kichad-bhari pagdandiyon ki gasht karvai, jinse vah bhale hi ab tak purnatः aparichit na rahi ho par is tarah hili-mili bhi nahin thi; aur in ‘duniyaon’ mein se jivan se labalbate aise-aise qaddavar charitr prkat kiye, jinhen hum vismrit nahin kar sakenge. ‘gadal’ ko kya koi bhul sakta hai. . . ?