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Pratinidhi Kahaniyan : Khushwant Singh

Rs. 75

पत्रकारिता से जुड़े रहकर भी खुशवंत सिंह ने अंग्रेज़ी में लिखनेवाले एक भारतीय कथाकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इस संग्रह में उनकी कुछ प्रतिनिधि कहानियाँ शामिल हैं, जिन्हें उनके तीन कहानी-संग्रहों से चुना गया है। खुशवंत सिंह की कहानियों का संसार न तो सीमित है और न... Read More

Description

पत्रकारिता से जुड़े रहकर भी खुशवंत सिंह ने अंग्रेज़ी में लिखनेवाले एक भारतीय कथाकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इस संग्रह में उनकी कुछ प्रतिनिधि कहानियाँ शामिल हैं, जिन्हें उनके तीन कहानी-संग्रहों से चुना गया है।
खुशवंत सिंह की कहानियों का संसार न तो सीमित है और न एकायामी, इसलिए ये कहानियाँ अपनी विषय-विविधता के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। ध्यान से पढ़ने पर इनकी दुनिया जहाँ हमारी सामाजिक दुनिया की अनेक ख़ासियतें उजागर करती हैं, वहीँ इनमें लेखक का अपना व्यक्तित्व भी प्रतिध्वनित होता है—विचारोत्तेजक और अनुभूतिप्रवण। शैली सहज, सरल और भाषा प्रवाहमयी है। जीवन के विस्तृत अनुभवों में पगी हुई इन कहानियों में अपने देश की मिट्टी की सोंधी गन्ध है।
मानव-जीवन में गहरे जड़ जमाए खोखले आदर्शों और दकियानूसी परम्पराओं पर कुठाराघात करती हुई ये चुटीली कहानियाँ अपने समय की जीवंत प्रतिध्वनियाँ हैं, जो यदि हमें गुदगुदाती हैं तो सोचने-समझने के लिए प्रेरित भी करती हैं। लेकिन साथ ही ये एक ऐसे भारतीय लेखक की कहानियाँ भी हैं, जो अपने मुँहफट स्वभाव और स्वतंत्र विचारों के लिए बहुत बार विवादों के घेरे में रहा है। Patrkarita se jude rahkar bhi khushvant sinh ne angrezi mein likhnevale ek bhartiy kathakar ke rup mein apni vishisht pahchan banai. Is sangrah mein unki kuchh pratinidhi kahaniyan shamil hain, jinhen unke tin kahani-sangrhon se chuna gaya hai. Khushvant sinh ki kahaniyon ka sansar na to simit hai aur na ekayami, isaliye ye kahaniyan apni vishay-vividhta ke liye vishesh rup se ullekhniy hain. Dhyan se padhne par inki duniya jahan hamari samajik duniya ki anek khasiyten ujagar karti hain, vahin inmen lekhak ka apna vyaktitv bhi prtidhvnit hota hai—vicharottejak aur anubhutiprvan. Shaili sahaj, saral aur bhasha prvahamyi hai. Jivan ke vistrit anubhvon mein pagi hui in kahaniyon mein apne desh ki mitti ki sondhi gandh hai.
Manav-jivan mein gahre jad jamaye khokhle aadarshon aur dakiyanusi parampraon par kutharaghat karti hui ye chutili kahaniyan apne samay ki jivant prtidhvaniyan hain, jo yadi hamein gudagudati hain to sochne-samajhne ke liye prerit bhi karti hain. Lekin saath hi ye ek aise bhartiy lekhak ki kahaniyan bhi hain, jo apne munhaphat svbhav aur svtantr vicharon ke liye bahut baar vivadon ke ghere mein raha hai.